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चुनावी साल में शिलान्यास की जल्दी ऐसी कि धानमंडी में गेहूं सीजन में बनवा रहे सड़कें, अब ढेरियों के लिए जगह तक नहीं

3 वर्ष पहले
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जिले भर की मंडियों में गेहूं की बंपर आवक शुरू हो चुकी है वहीं मंडी में व्यवस्था बनाने वाला विभाग ही स्थिति बिगाड़ने पर लगा हुआ है। जिला मुख्यालय पर जंक्शन व टाउन धान मंडी में महज दो दिन पहले सड़कों का निर्माण कार्य शुरू किया गया है जबकि अभी हालात यह है कि मंडी से सामान्य वाहन निकलने की भी जगह नहीं है। जानकारी के मुताबिक चुनावी वर्ष में शिलान्यास पटि्टका लगवाने की जल्दबाजी में सड़कों के निर्माण कार्य सीजन के बीच शुरू करवाया गया है। इससे एक तरफ ठेकेदार को काम जारी रखने में परेशानी हो रही है वहीं दूसरी तरफ किसानों के आवागमन का रास्ता भी बंद हो गया है। गौरतलब है कि बैसाखी पर्व आते-आते जिले की मंडियां गेहूं की ढेरियाें से पूरी तरह भर जाती हैं। एक-दो दिन बाद मंडी परिसर के अलावा आसपास की सड़कों पर भी गेहूं के ढेर नजर आते हैं। मंडी में गेहूं की ढेरी लगाने के लिए भी किसानों के बीच विवाद होते हैं। टाउन मंडी में तो दो दिन पहले ऐसा मामला सामने भी आया था। ऐसे हालात में मंडी के भीतर की सड़कों का निर्माण शुरू होने से पूरी व्यवस्था गड़बड़ाने की आशंका है। वहीं चुनावी वर्ष में शिलान्यास पटि्टका लगवाने की जल्दबाजी में अधिकारियों ने सीजन के बीच में ही काम शुरू करवा दिया लेकिन अब यह कदम गले की फांस बनता जा रहा है। हालत यह है कि ठेकेदार को मशीनरी निकालने के लिए भी जगह नहीं मिल रही है। उधर, निर्माण सामग्री डालने पर भी किसान आपत्ति जता रहे हैं। इस कारण काम बीच में ही अटकता नजर आ रहा है। अब विभागीय अधिकारियों का कहना है कि संभव हुआ तो काम जारी रहेगा। दिक्कतें आती हैं तो एक बार काम रूकवाकर दोबारा शुरू करवाया जाएगा।

ये देखिए, पिछले साल इसी सड़क पर गेहूं की ढेरियां थी। इस साल सड़क को तोड़ दिया गया है

धान मंडी में गेहूं की बंपर आवक जारी है। इसके बीच सड़क निर्माण किसानों के लिए परेशानी का सबब बन रहा है। अभी जिस सड़क से डामर उतारकर दोबारा निर्माण का काम चल रहा है, उसी पर पिछले साल गेहूं की ढेरियां लगी हुई थी। अब स्थिति यह है कि सड़क से निकलना भी दूभर है। यही स्थिति जंक्शन मंडी की तीन अन्य सड़कों की भी है।

कृषि उपज मंडी समिति की अोर से जंक्शन में चार व टाउन में एक सड़क निर्माण के लिए टेंडर जारी हुए थे। करीब डेढ़ करोड़ से बनने वाली सड़कों के निर्माण के लिए मार्च माह में टेंडर प्रक्रिया भी पूरी हो गई। इसके बाद करीब एक महीन विभागीय स्वीकृति में लगा दिया गया। बुधवार को सड़कों की निर्माण स्वीकृति जारी हुई और ठेकेदार ने काम शुरू कर दिया। अब स्थिति यह है कि सीजन के बीच में सड़कों का डामर उखाड़कर निर्माण कार्य किया जा रहा है और उधर, मंडी में गेहूं की ढेरियां लगने के कारण जगह सिमटती जा रही है।

अधिकारी बोले- 3-4 सड़कें टूटी थी, मार्च में टेंडर हुए, व्यापारियों की मांग पर ही बनवा रहे हैं

मंडी की तीन-चार सड़कें टूटी हुई थी। सीजन में सड़कों पर भी गेहूं की ढेरियां लग जाती हैं। ऐसे में टूटी हुई सड़कों की बजरी गेहूं में मिलने की आशंका थी। इसे ध्यान में रखते हुए व्यापारियों की मांग पर सड़कों का निर्माण करवाया जा रहा है। लाजपतराय खुराना, मंडी सचिव

सड़कों की टेंडर प्रक्रिया मार्च में पूरी हुई थी। विभागीय प्रक्रिया के बाद अब निर्माण स्वीकृति जारी की है। सड़कों के निर्माण के लिए स्थानीय राजनेता भी मांग कर रहे थे। इसलिए निर्माण शुरू करवाना पड़ा। ज्यादा दिक्कत हुई तो एक बार काम रुकवा देंगे। रामस्वरूप, एक्सईएन, कृषि विपणन

मंडी समिति को करनी होती है पूरी व्यवस्था : धान मंडी में पूरी व्यवस्था मंडी समिति को ही करनी होती है। गेहूं के सीजन में खासतौर पर काम का दबाव रहता है। समर्थन मूल्य पर खरीद के चलते अप्रैल माह के मध्य तक मंडियां गेहूं की ढेरियों से भर जाती हैं। इस सीजन के लिए मंडी समिति की ओर से किसानों के लिए पेयजल, शौचालय आदि छोटी-बड़ी सभी व्यवस्थाएं करनी होती हैं। मंडी समिति के पास ही सड़क निर्माण आदि का बजट होता है। ऐसे में विभाग से उम्मीद की जाती है कि फसलाें की आवक के समय किसानों को किसी तरह की दिक्कत न आए। अब विभाग के पास खुद ही बजट होने व पूरी स्थिति से वाकिफ होने के बावजूद सीजन के बीच में निर्माण शुरू करवाना पूरी व्यवस्था पर ही प्रश्नचिंह लगा रहा है।

गेहूं के सीजन में मंडी के बीचोंबीच निर्माण कार्य शुरू करना विभाग की लापरवाही को दर्शाता है। एक-दो दिन के भीतर मंडी गेहूं से भर जाएगी। ऐसे हालात में ठेकेदार काम नहीं कर पाएगा या फिर किसानों को दिक्कत का सामना करना पड़ेगा। लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई होनी चाहिए। रघुवीर वर्मा, माकपा सचिव

मंडी में हर साल कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। आवारा पशु ढेरियों को बिखरते हैं और सामान्य सुविधाएं मिलने में भी दिक्कत होती है लेकिन इस बार तो मंडी समिति की ओर से हद ही कर दी गई है। सड़क निर्माण बीच में रोकना पड़ेगा या किसानों को मंडी में आने में दिक्कत होगी। ओम स्वामी, किसान

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