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डॉक्टरों की लापरवाही से नवजात की मौत का आरोप, परिजनों का प्रदर्शन, जांच को टीम गठित
जिला अस्पताल में डॉक्टर की ओर से गर्भवती महिला को बिना किसी जांच के डिलीवरी में देरी होने का कहकर बैरंग लौटाने के बाद घर पर डिलीवरी से नवजात शिशु की मौत हो गई। इस आरोप के साथ आक्रोशित परिजनों एंव दलित संगठनों से जुड़े पदाधिकारियों ने बुधवार को ट्रोमा सेंटर के बाहर प्रदर्शन किया।
उपनियंत्रक का घेराव कर लापरवाही बरतने वाले डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई नहीं होने पर चक्काजाम की चेतावनी दी। उपनियंत्रक डॉ. दीपकमित्र सैनी ने कमेटी गठित कर निष्पक्ष जांच कराने का आश्वासन दिया तो आक्रोशित नागरिक शांत हुए। नागरिकों ने चेतावनी दी कि अगर तीन दिवस में संबंधित डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन तेज करेंगे। राष्ट्रीय युवा मोर्चा अनुसूचित जाति जनजाति के महासचिव नारायण नायक व वार्ड 16 के पार्षद पति पवन मौर्य के नेतृत्व में प्रसूता के परिजन सुबह साढ़े 11 बजे जिला अस्पताल पहुंचे। ट्रोमा सेंटर के आगे रोष प्रदर्शन अस्पताल प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। इस बीच उपनियंत्रक डॉ. दीपक सैनी मौके पर पहुंचे और समझाइश की लेकिन वह नहीं माने और धरने पर बैठ गए।
उपनियंत्रक ने इमरजेंसी सेवाएं बाधित होने की बात कहकर वार्ता करने की बात कही। इसके बाद पुलिस चौकी में हुई वार्ता में उपनियंत्रक ने पीएमओ को अवगत कराकर कमेटी गठित कर निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया।
हनुमानगढ़. टाउन जिला अस्पताल में नवजात की मौत के बाद उपनियंत्रक से वार्ता करते लोग।
डाॅक्टर बोले- अभी 13 दिन बाकी, घर जाते ही हुई डिलीवरी
परिजनों के मुताबिक 17 अप्रैल को टाउन के वार्ड 16 निवासी पूजा प|ी सुभाष मेघवाल को डिलीवरी के लिए जिला अस्पताल लेकर पहुंचे तो डॉक्टर ने बिना जांच कर 30 अप्रैल तक डिलीवरी होने का कहकर वापिस भेज दिया। इस बीच घर पहुंचते के एक घंटे के भीतर ही महिला के डिलीवरी हो गई जिसे निजी अस्पताल ले जाया गया जहां पर बच्चे की मौत हो गई। परिजनों का कहना है कि अगर डॉक्टर की ओर से प्रसूता को उसी समय भर्ती कर उपचार किया जाता तो बच्चे की जान बच सकती थी। डॉक्टर की लापरवाही से नवजात की मौत हो गई। बच्चे की मौत से उसकी मां की सुध-बुध खोई हुई है।