फर्जीवाड़ा रोकने नापतौल विभाग बनवाएगा प्लेट
वजन मशीनों पर लगने वाली प्लेटें अब नापतौल विभाग ही तैयार कराएगा। इन पर मप्र शासन का लोगो रहेगा। इसी से असली-नकली सील की पहचान होगी। सील का पूरा रिकॉर्ड ऑनलाइन सॉफ्टवेयर में मेंटेन होगा। इससे कभी भी मशीन की पूरी कुंडली सामने आ सकेगी। वजन मशीनों पर अब एक जैसी प्लेट और सील नजर आएगी। विभाग ऐसी प्लेटें बनवा रहा है, जिन पर मशीन का निर्माण वर्ष, मॉडल नंबर, मैन्यूफैक्चर का नाम, अधिकतम और न्यूनतम क्षमता और श्रेणी का ब्यौरा रहेगा।
प्लेट के नीचे फोन नंबर भी रहेगा, जिस पर वेरिफिकेशन संबंधी शिकायत की जा सकेगी। नई प्लेटें अगस्त से चलन में आएंगी। मौजूदा व्यवस्था में नापतौल विभाग वजन मशीनों के केवल सत्यापन प्रमाण-पत्र जारी करता है। प्लेट और उन पर सील लगाने का काम मशीन सुधारने वाले करते हैं। नापतौल विभाग तक व्यापारियों से ऐसी जानकारी पहुंची है कि सील में फर्जीवाड़ा हो रहा है।
विभाग को लग रही है चपत: अफसरों के मुताबिक मशीन सुधारने वाले मशीनों की संख्या कम बताकर प्रमाण-पत्र जारी करा लेते हैं। बाकी मशीनों की सिर्फ प्लेट बेच दी जाती हैं।
नाप-तौल में गड़बड़ी रुकेगी
पहले मशीनों पर रांगे (एक किस्म की धातु) की प्लेट लगती थी। वह बाहर नहीं निकलती थी। फिर मशीन पर होल कर तार डालकर प्लेट लगाई जाने लगी। समय के साथ यह व्यवस्था भी बंद हो गई। अब मशीन सुधारने वाले खुद ही प्लेट बनाते हैं। उन पर ऐसी सील लगाई जाती है कि फर्जीवाड़ा पकड़ में नहीं आता है। इससे सरकारी राजस्व का नुकसान हो रहा है।
देना होगी बिल की स्कैन कॉपी
मशीन सुधारने वाले फिलहाल जानकारी हाथ से टाइप करते हैं। इसमें फर्जीवाड़ा होता है। सॉफ्टवेयर पर मनमाफिक आंकड़े भरे जाते हैं। इसलिए अब विभाग बिलों की स्केंन कॉपी लेगा। यानी जो बिल व्यापारी को दिया है, वहीं विभागीय रिकॉर्ड में जमा कराना होगा।
हो सकेगी स्टाफ के सदस्यों की पुष्टि
विभागीय अफसरों का कहना है कि प्लेट पर लिखे कार्यालय के फोन नंबर से व्यापारी पुष्टि कर पाएंगे कि मशीनों की जांच करने गए दल में सरकारी कर्मचारी-अफसर हैं या मशीन सुधारने वाले के लोग। ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें मशीन सुधारने वालों ने व्यापारियों को डरा-धमकाकर उनसे मोटी रकम वसूल कर ली।