10 साल बाद सर्वार्थ सिद्धि व अश्विनी नक्षत्र का संयोग
शुभ कार्यों व दान-पुण्य के लिए विशेष फलदायी रहेगा
भास्कर संवाददाता | हरदा
सोमवती अमावस्या इस बार 16 अप्रैल को विशेष संयोग में मनेगी। 10 साल बाद वैशाख में सोमवती अमावस्या पर सर्वार्थ सिद्धि व अश्विनी नक्षत्र का संयोग बना है। जो शुभ कार्यों व दान-पुण्य के लिए विशेष फलदायी रहेगा। पंडितों का कहना है कि सोमवती अमावस्या साल में एक या दो बार ही होती है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान व दान से कई गुना फल मिलता है।
बताया जा रहा है कि 18 अप्रैल को अक्षय तृतीया और 22 अप्रैल को गंगा सप्तमी भी शुभ कामों के लिए श्रेष्ठ दिन रहेंगे। इस माह में शुभ कार्य व खरीदी के लिए सोमवती अमावस्या, अक्षय तृतीया व गंगा सप्तमी के दिन पंडितों ने श्रेष्ठ बताए हैं। 16 अप्रैल को सोमवती अमावस्या पर दो बड़े शुभ व लाभकारी योग रहेंगे। इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग रहेगा। इसके साथ नक्षत्र मंडल का प्रथम अश्विनी नक्षत्र का भी इसी दिन होना इस दिन की शुभता में वृद्धि करने वाला रहेगा।
इस नक्षत्र के स्वामी भगवान गणेश हैं, जो विघ्नहर्ता हैं। वैशाख में सोमवती अमावस्या का संयोग एक दशक बाद हो रहा है। इसके पूर्व 5 मई 2008 में वैशाख में सोमवती अमावस्या हुई थी। वैशाख में सोमवती अमावस्या पर बन रहे इस योग के दिन पवित्र नदियों में स्नान व दान से कई गुना फल मिलता है।
भगवान चित्रगुप्त का प्राकट्य दिवस भी
गंगा सप्तमी अपने आप में स्वयं सिद्ध मुहूर्त वाला दिन है, इसी इस दिन पुष्य नक्षत्र योग भी रहने से इस तिथि का महत्व गई गुना बढ़ गया है। पंडित विजय काशिव के अनुसार गंगा सप्तमी को रविवार है। इस दिन रवि पुष्य योग भी रहेगा। इसी दिन भगवान चित्रगुप्त का प्राकट्य दिवस भी है। गंगा व चित्रगुप्त की पूजा वाले इस दिन में किए गए शुभ कार्य विशिष्ट फलदायी रहेंगे। खरीद-फरोख्त करने के लिए भी यह दिन उत्तम रहेगा।
मन के विकारों को दूर करने का दिन
सोमवार भगवान शिव और चंद्रमा का खास दिन होता है। इस दिन अमावस्या पर मन के विकारों को दूर करने के लिए शिव व चंद्रमा के मंत्रों का जाप करना चाहिए। पवित्र नदियों में स्नान व दान करने से भी पितृदोष दूर होते हैं। पौधरोपण करने से भी कष्टों मिटते हैं। इस दिन पुण्य कार्य व खरीदी वस्तुओं को स्थायित्व प्राप्त होता है।