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मैंहगरोवाल खड्ड पर एकाधिकार की थी लड़ाई

3 वर्ष पहले
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अकाली-भाजपा सरकार के समय यह मामला दायर हुआ था। मैंहगरोवाल जिसे तखनी खड्ड भी कहा जाता है इसके एकाधिकार को लेकर सारा विवाद हुआ। इस खड्ड में सबसे ज्यादा रेत है लेकिन तखनी वाइल्ड सेंक्चुरी होने की वजह से इस खड्ड में खनन की अनुमति नहीं है। इसी वजह से विभाग ने इस खड्ड की नीलामी आज तक नहीं करवाई। हालांकि, इस खड्ड में अवैध खनन के मामले पहले भी आ चुके थे। जब पंजाब में रेत महंगी हुई तो खनन माफिया ने इस खड्ड को भी नहीं छोड़ा। बताया जाता है कि संदीप सिंह सोढ़ी और उसके कुछ साथियों ने इस खड्ड में माइनिंग शुरू कर दी, जिसकी जानकारी एक नेता को मिल गई और उसने तुरंत मामला दायर करवा दिया। असल में जिस सुरिंदर सिंह को सजा हुई है वह जालंधर के ट्रांसपोर्टर हैं और उनके टिप्पर थे और खड्ड सोढ़ी चला रहा था। मामला दर्ज करने से पहले उस दिन थाना हरियाना के एसएचओ का पहले तबादला करवाया गया और बाद में एसएचओ के तबादले के तुरंत बाद रात को यह मामला दायर किया गया। कुछ समय बाद यहां दोबारा माइनिंग शुरू हो गई लेकिन इस बार माइनिंग का आरोप उसी अकाली नेत पर लगा जिसने इस मामले को उठाया था।

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