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एक सप्ताह से घरों में आ रहा मटमैला व बदबूदार पानी

3 वर्ष पहले
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नगर में इन दिनों नलों से आने वाली पेयजल सप्लाई लाइन में मटमैला और बदबूदार पानी आ रहा है। जिससे लोग परेशान हैं। बीते एक सप्ताह से यह समस्या बनी हुई है। हालांकि पानी को फिल्टर करने के लिए नगर पालिका द्वारा फिटकरी की मात्रा बढ़ाई गई है, लेकिन इससे लोगों को नुकसान हो सकता है। इतना ही नहीं मटमैला और दूषित पानी पीकर लोग बीमार हो रहे हैं। अस्पताल में पीलिया, टाइफाइड, डायरिया जैसी कई बीमारी से पीड़ित मरीज पहुंच रहे हैं।

कमला नेहरू वार्ड निवासी पप्पू चौरसिया, राजेश ने बताया कि पानी में पीलेपन तो आ ही रहा है, लेकिन स्वाद भी बदल गया है। जिससे सही तरीके से प्यास भी नहीं बुझती है। वहीं धर्मेंद्र, विशाल साहू, तरूण साहू, शबाना बी, कमलाबाई, अनीता, रूकसाना बेगम ने बताया कि मटैमला पानी आने के संबंध में नगर पालिका को शिकायत भी कर चुके हैं, लेकिन स्थिति में कोई सुधार नहीं हो रहा है।

इसलिए गंदा आ रहा पानी: दरअसल सुनार नदी में कम मात्रा में पानी बचा है। तहां पर पानी की तलहटी नजर आने लगी है। जहां पर दिन भर मवेशी तैरते रहते हैं। ऐसे में इंटकवेल के पास पानी गंदा हो जाता है। यही पानी फिल्टर प्लांट पहुंचता है, लेकिन पानी में काफी मात्रा में गंदगी होने के कारण फिटकरी भी पूर्णत: पानी को साफ नहीं कर पा रही है।

अब हारट नहर से बंधी आस

नदी में अप्रेल माह के शुरूअाती दिनों में ही नाममात्र का पानी बचा है। ऐसे में आने वाले दिनों में और भी भयंकर स्थिति पैदा होने की संभावना है, ऐसे में अब 9 किमी दूर हारट से ही आस बंधी है। बीते साल मई माह में हारट से नहर के माध्यम से पानी को फिल्टर पहुंचाया गया था, जिससे काफी हद तक पेयजल समस्या से निपटारा मिला था।

जल्द सुधर जाएगी स्थिति
चंूकि नदी में कम पानी बचा है, जिससे फिल्टर तक काफी मात्रा में गंदा पानी पहुंच रहा है। पानी को साफ करने के लिए फिटकरी की मात्रा भी बढ़ा दी है, लेकिन इससे ज्यादा फिटकरी नहीं डाल सकते क्योंकि इससे उल्टा प्रभाव पड़ेगा। संभवत: दो-तीन दिन में हारट नहर से पानी लाने के प्रयास किए जा रहे हैं। जिससे गंदे पानी की समस्या हल हो जाएगी। - प्रियंका झारिया, सीएमओ

नगर से निकली सुनार नदी में कम मात्रा में पानी बचा है। इनसेट: घरों में सप्लाई किया जाने वाले पानी में गंदगी।

दस मिनट बाद तली में जम जाती है गंदगी
चंडीजी वार्ड निवासी गृहणी हेमलता पटेल, शीलाबाई, भारती दुबे ने बताया कि नगर पालिका द्वारा सप्लाई किए जा रहे पानी को बर्तन में दस से पंद्रह मिनट रखने के बाद तली में काफी गंदगी जम जाती है। इतना गंदा पानी तो बारिश में भी नहीं आता था। मजबूरी में पानी को छानकर पीना पड़ता है, लेकिन जब से इस पानी का सेवन कर रहे हैं, उसके बाद परिवार के लोगों में पेट संबंधी समस्याएं पैदा हो रहीं हैं। नगर पालिका को चाहिए कि पानी को पीने योग्य बनाए।

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