रानीजरौद, आमाकोनी व जांगड़ा के कई किसानों को नहीं मिली सूखा राहत राशि
कृषि सत्र 2017 - 18 में पड़े भयंकर सूखे के बाद किसानों को कृषि ऋण माफी अथवा फसल बीमा का लाभ मिलना तो दूर 6 माह बीत जाने के बावजूद राज्य सरकार द्वारा घोषित सूखा राहत क्षतिपूर्ति की राशि से भी हल्का पटवारियों द्वारा किए गए त्रुटि से अंचल के रानीजरौद आमाकोनी व जांगड़ा गांवों में ही सैकड़ों कृषक वंचित रह गए हैं। वहीं शिकारी केशली , बुड़गहन , सुहेला , बासीन , फरहदा , टेकारी आदि गांवों के दर्जनों कृषकों को या तो रकबे के अनुसार कम राशि मिली या मिली ही नहीं है।
दर्जनों कृषकों को रकबे के अनुसार कम राशि मिली
35 प्रतिशत तक उपज पैदा हुई
गौरतलब है कि क्षेत्र में 35 प्रतिशत तक ही आनावारी रिपोर्ट के अनुसार फसल हो पाई है और सुहेला सहित अनेक गांवों में पैरा तक नहीं हुआ है। स्थानीय हल्का पटवारी अजय अनंत ने कहा कि कृषकों का नाम बी 1 में नहीं होने के कारण सूची में छूट गया। वहीं जांगड़ा पटवारी सीएल सहारे ने कहा कि सूची पूर्व पटवारी ने तैयार की थी। और जो बच गए हैं उन्हे लाभ नहीं मिल पाएगा।
क्षतिपूर्ति के लाभ से वंचित रह गए
आमाकोनी के 250 किसानों में महज 60 जांगड़ा के लगभग ढाई सौ किसानों में 70 व रानीजरौद के दो सौ किसानों में 25 से 30 लोगों को ही क्षतिपूर्ति का लाभ मिल पाया है। शिकारी केशली व सुहेला में तो राजस्व विभाग के अंग रहे कोटवार भी क्षतिपूर्ति के लाभ से वंचित रह गए हैं। सुहेला के रामसिंह , जगदीश पाल ने बताया कि उनके रकबे को कम कर दिया गया है यहां पर श्याम लाल वर्मा, खेमलाल वर्मा, गुमान पाल सहित अनेक किसानों का नाम क्षतिपूर्ति लिस्ट में छोड़ दिया गया है। टेकारी के सुरजु ध्रुव, बैशाखन सिन्हा, देवसिंह फरहदा के धनुष शिकारी केशली , बुड़गहन गांवों में भी कृषकों को राशि अब तक नहीं मिल पाई है।
आमाकोनी की सूची अब तक नहीं मिली
जिला सहकारी बैंक शाखा हतबंध के शाखा प्रबंधक एचएन घृतलहरे ने 22 गांवों के कृषकों के लिए सूखा राहत राशि का चेक बैंक को मिलना बताते हुए कहा कि आमाकोनी की सूची अब तक नहीं मिली है। वहीं जिला सहकारी बैंक शाखा भटभेरा के प्रबंधक अशोक पटेल ने रानीजरौद का चेक आज कल में ही मिलना बताया। सिमगा एसडीएम मनोज केसरिया ने कहा कि तहसीलदार द्वारा सभी कृषकों को क्षतिपूर्ति बांटी गई है, ऐसा हो सकता है कि सर्वे के दौरान कोई गांव से बाहर रहा हो जिसका नाम छूट गया हो।