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दोबारा नामांकन शुल्क के विरोध में प्रदर्शन

3 वर्ष पहले
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केबी महिला कॉलेज में शुक्रवार को स्नातक की छात्राओं से एक साल में दोबारा नामांकन शुल्क लेने के विरोध में छात्र संगठन डीएसओ ने विभावि मुख्यालय में प्रदर्शन किया। केबी महिला कॉलेज ने स्नातक के पहले साल के दूसरे सेमेस्टर में विद्यार्थियों से नामांकन शुल्क लिया है।

प्रावधान के अनुसार साल में एक बार ही नामांकन शुल्क लगता है। प्रदर्शन करनेवाले विद्यार्थी दोपहर 12 बजे से प्रशासनिक भवन के मेन गेट पर बैठ गए। डीएसडब्ल्यू, कॉलेज की प्राचार्या डॉ. रेखा रानी और वीसी के खिलाफ विद्यार्थियों ने अपना गुस्सा निकाला। बाद में प्रदर्शन करनेवाले प्रशासनिक भवन के तीसरे तल्ले पर स्थित वीसी सचिवालय पहुंचकर जमकर नारेबाजी किया। अवैध वसूली और सीबीसीएस को वापस लेने की मांग की। रजिस्ट्रार डॉ. बीपी रूखैयार और डीआर डॉ. गौरीशंकर तिवारी ने प्रदर्शनकारियों को समझने का प्रयास किया। अंतत: वीसी प्रधानाचार्यों के साथ चल रही बैठक छोड़कर बाहर आकर प्रदर्शनकारियों से बात की।

वीसी ने बताया कि नामांकन शुल्क के मामले में कॉलेज प्रबंधन को शो कॉज किया गया है। अन्य तीन कॉलेज से भी सेकंड सेमेस्टर (दूसरी छमाही) में नामांकन शुल्क लिए जाने की शिकायत मिली थी। नामांकन शुल्क सहित कक्षाओं के नहीं होने के मामले में प्राे वीसी की अध्यक्षता में कमेटी गठित किया गया है। कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर हम इसमें कार्रवाई करेंगे। वीसी ने कहा कि सीबीसीएस में शुल्क संरचना को लेकर डायरेक्शन क्लियर नहीं है। इसलिए फी लिया गया। फी की रसीद दी गई। इसका मतलब है कि वो पैसा कॉलेज के अकाउंट में आया। इसमें विश्वविद्यालय का नियंत्रण रहता है। कई कॉलेज से बिना रसीद काटे शुल्क लिए जाने का मामला आया है। इन्हीं मुद्दों को लेकर प्राचार्यों की बैठक बुलाई गई है।

विभावि में पूर्व से सेमेस्टर सिस्टम लागू था। पूर्व कुलपति डॉ. गुरदीप सिंह ने बिना तैयारी विभावि के पीजी और यूजी दोनों में सीबीसीएस लागू कर दिया। सीबीसीएस आने से स्नातक के विद्यार्थियों की परीक्षाओं की संख्या बढ़कर तीन से बढ़कर 18 हो गई। इसमें छ: सेमेस्टर और 12 इंटर्नल परीक्षाएं होती हैं। शुल्क वृद्धि के मामले में पूर्व वीसी को विद्यार्थियों के विरोध के सामने झुकना पड़ा और उन्होंने घोषणा कर दिया हर नामांकन शुल्क पूर्व की तीन बार ही लगेगा। छ: सेमेस्टर की परीक्षाओं का शुल्क देय होगा। परीक्षाएं बढ़ गई, गेस्ट फैकल्टी रखे गए। कोर्स के संचालन और परीक्षा आयोजन के खर्च में लगभग 40 फीसदी बढ़ गया। कॉलेजों को परेशानी होने लगी। इसको लेकर विभावि प्रशासन ने नामांकन, आवेदन प्रपत्र परीक्षा शुल्क में वृद्धि करने की मौन सहमति दे दिया।

विभावि में प्रदर्शन करते डीएसओ के प्रतिनिधि।

शुल्क में एकरूपता होनी चाहिए

एआईडीएसओ जिलाध्यक्ष जीवन कुमार यादव ने कहा है कि विश्वविद्यालय छात्रों के लिए है। हमारी सहमति लिए बगैर बिना जानकारी दिए नया शुल्क लिया जाना यूनिवर्सिटी एक्ट के खिलाफ है। कॉलेजों में बिना पढ़ाए परीक्षाएं आयोजित की जा रही हैं। ऐसा ही करना है तो 75 प्रतिशत उपस्थिति की बाध्यता को समाप्त कर सबको उपाधियां बांट दी जानी चाहिए।

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