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किन परिस्थितियों में छात्रवृत्ति राशि सरेंडर हुई, मांगा एक सप्ताह में जवाब

3 वर्ष पहले
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उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल की आयुक्त वंदना दादेल ने बुधवार को अपने कार्यालय कक्ष में कल्याण विभाग एवं समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित योजनाओं की समीक्षा की। प्रमंडल स्तरीय समीक्षा में बारी बारी से प्रमंडल के सात जिलों की समीक्षा की गई।

कल्याण विभाग की समीक्षा के दौरान प्री मैट्रिक की छात्रवृत्ति की राशि सरेंडर किये जाने की बात सामने आने पर आयुक्त ने जिला कल्याण पदाधिकारियों से एक सप्ताह के अंदर विस्तृत रिपोर्ट देने का निर्देश दिया। कहा कि किन परिस्थितियों में उपलब्ध राशि को सरेंडर करना पड़ा। बैठक में उप निदेशक कल्याण, उत्तरी छोटानागपुर कृष्ण कुमार सिंह, हजारीबाग जिला कल्याण पदाधिकारी मिथिलेश झा, कोडरमा के अनुज कुमार सहित अन्य जिलों के अधिकारी उपस्थित थे। कल्याण एवं समाज कल्याण विभाग की अलग अलग समीक्षा की गई।

2.24 करोड़ रुपए हजारीबाग में हुआ सरेंडर : जानकारी के अनुसार हजारीबाग जिला में दो करोड़ 24 लाख रुपए छात्रवृत्ति की राशि सरेंडर हुई है। इसमें सर्वाधिक गिरिडीह जिला में 4.57 करोड़, बोकारो जिला में 3.18 करोड़, चतरा जिला में 1.51 करोड़ रुपए सरेंडर किया गया है। प्राथमिक विद्यालय, माध्यमिक एवं उच्च विद्यालय में पढ़ने वाले अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ी जाति के छात्र छात्राओं की छात्रवृत्ति के लिए जिलों को राशि उपलब्ध कराई गई थी। इसी प्रकार साइकिल वितरण योजना की राशि भी सरेंडर हुई है। सरकारी विद्यालयों में आठवीं कक्षा में पढ़ने वाली छात्राओं को साइकिल वितरण कराने की योजना है, जिसमें हजारीबाग जिला अंतर्गत 28.17 लाख रुपए सरेंडर हुए हैं।

बैठक में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत मुआवजा के लंबित मामलों की रिपोर्ट से असंतुष्ट प्रमंडलीय आयुक्त ने जिला कल्याण पदाधिकारियों को संबंधित पुलिस उपाधीक्षकों के साथ समंजन एवं बैठक कर निष्पादन करने का निर्देश दिया। उसी प्रकार बिरसा आवास योजना की समीक्षा के दौरान राशि खर्च दिखाया गया मगर भौतिक सत्यापन से संबंधित प्रतिवेदन नहीं थे। सरना स्थल, कब्रिस्तान की घेराबंदी के संबंंध में जिला कल्याण पदाधिकारियों को स्थल का निरीक्षण कर रिपोर्ट देने के लिए कहा।

15 जून के बाद बारी बारी से जिलों का दौरा करके आयुक्त स्वयं लेंगी जायजा : बताया कि 15 जून के बाद सभी जिलों का बारी बारी से दौरा कर जिला स्तर पर समीक्षा तथा योजना स्थल जाकर वास्तविक स्थिति का आंकलन करेंगी। वनाधिकार पट्टा से संबंधित वर्ष 2017-18 की रिपोर्ट नहीं रहने के कारण, एक सप्ताह के अंदर अलग से रिपोर्ट देने के लिए कहा गया।

अधिकारियों के साथ बैठक करती आयुक्त।

सेविका सहायिका के रिक्त पदों पर एक माह के अंदर बहाली का विश्वास दिलाया

समाज कल्याण विभाग की समीक्षा करते हुए आयुक्त ने प्रमंडल अंतर्गत विभिन्न जिलों में सेविका सहायिका के रिक्त पदों पर बहाली की बात पूछी इसपर समाज कल्याण पदाधिकारियों एक माह के अंदर बहाल कर लेने का भरोसा दिलाया। हजारीबाग में सेविका के 29 तथा सहायिका के 27 पद रिक्त हैं। गिरिडीह में 72 रिक्त हैं। कुपोषित बच्चों के संबंध में आयुक्त ने अलग से रिपोर्ट मांगी, जिले में कितने कुपोषित उपचार केंद्र चल रहे हैं। उनमें कितने बेड हैं, उनमें नियमित रूप से कितने भरे रहते हैं और कितने खाली। उन्होंने पूरक पोषाहार, किशोरी बालिका सबला योजना, मुख्यमंत्री कन्यादान योजना, लाडली योजना, स्वामी विवेकानंद नि:शक्त योजना आदि की भी समीक्षा की गई ।

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