डॉ. रौनक नाज़ की पुस्तक अलीम सबा नवेदी की साहित्यिक सेवा का विमोचन
डॉक्टर रौनक नाज़ की लिखी किताब अलीम सबा नवेदी की साहित्यिक सेवा का विमोचन जामा मस्जिद रोड में किया गया। आयोजन उर्दू सेवियों की संस्था बज्म हमकलम ने किया था।
विमोचन समारोह की अध्यक्षता विनोबा भावे विश्वविद्यालय विभाग उर्दू हेड डॉ. जैन रामिश ने किया। मुख्य अतिथि रिटायर्ड टीचर अली मुनीर और संत कोलंबा कॉलेज में उर्दू विभाग अध्यक्ष डॉक्टर जमाल अहमद मौजूद थे। विभावि के मानविकी संकाय डीन डॉ. ए एम सिद्दीकी भी शामिल हुए। डॉ. रौनक नाज़ ने कि अलीम सबा नवीद आधुनिकता के बेहतरीन न मिसाल पेेेश किया है। साहित्य में उनकी सेवाओं को कभी भी भुलाया नहीं जा सकता है। इस किताब को पूरी करने में गाइड और हमारे परिवार के लोगों का साथ रहा। अध्यक्षता कर रहे डॉ जैन रामिश ने पुस्तक की चर्चा करते हुए कहा कि रौनक नाज़ ने वैज्ञानिक और साहित्यिक स्तर पर बुत तोड़े हैं। उर्दू की उच्च शिक्षा की उपलब्धि के साथ उन्होंने ऐसी कई काम किया हैं जो हर किसी के लिए संभव नहीं हैं। निश्चित रूप से नाज की उपलब्धियों में इस पुस्तक को याद किया जाएगा। शोध को आधार बनाकर तैयार की गई पुस्तक में विषय को करीने से सजाया गया है।
डाॅ. जमाल अहमद ने कहा कि डॉ. रौनक नाज़ बहुत कम समय में बहुत सलीके से साहित्य जगत में अपनी पहचान बनाया। साहित्य और सामाजिक क्षेत्र में पहचान कायम किया। पुस्तक को एक ऐसे व्यक्ति पर लिखा है जिन्होंने साहित्य में समय सीमा से कभी समझौता नहीं किया। नए प्रयोगों को उर्दू साहित्य में स्थान दिया। आधुनिकता उनकी पहचान बनी।
अवकाश प्राप्त शिक्षक अली मुनीर ने कहा कि इस पुस्तक के प्रकाशन में अदब व शायरी दोनों का समन्वय है। मंच संचालन डॉ. आशिक खान ने किया। आयोजन को शायर नटखट अजीमाबादी, डॉ. इरफान अशरफी, डॉक्टर आफताब हसन, मोहम्मद एजाज, डॉक्टर नसीम अहमद, डॉ. नुदरत परवीन और डॉ सनोवर नाज़ शामिल थे।
पुस्तक का विमोचन करते अतिथि।