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उर्दू आम हिंदुस्तानियों की भाषा है इसने लोगों को जोड़ा है : डॉ. जमाल

3 वर्ष पहले
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संत कोलंबा महाविद्यालय, उर्दू विभाग में उर्दू अदब और राष्ट्रीय एकता विषय पर सेमिनार आयोजित किया गया। विद्यार्थियों के लिए आयोजित सेमिनार में कई सेमेस्टर के विद्यार्थी शामिल हुए। निर्धारित विषय पर पूरी बेबाकी के साथ विद्यार्थियों ने अपनी बातें रखी।

अध्यक्षता विभागाध्यक्ष उर्दू हेड डॉ. जमाल अहमद ने किया। उन्होंने सेमिनार को संबोधित करते हुआ कहा कि यह बात कहना गलत होगा की उर्दू मुसलमानों की जुबान है। उर्दू आम हिन्दुस्तानियों की जुबान है। उर्दू नहीं जाननेवाले भी इसके शब्दों का इस्तेमाल करते हैं। उर्दू हिंदुस्तान में घुल मिल गई है। उर्दू में हिन्दुस्तान की रूह बस्ती है। हमारे देश में जो प्यार और मोहब्बत लोगों के बीच नजर आता है, वो दुनिया के दूसरे मुल्कों में दिखाई नहीं देता। उर्दू ने अपने अदब के बेहतरीन व मीठे अलफ़ाज़ से कौमी एकता को हमेशा दिशा दिया है। राष्ट्रीय एकता में उर्दू की मौजूदगी शुरू से ही अपने वतन के लिए बेमिसाल रही है। हिंदुस्तान की मिट्‌टी से जन्मे इस भाषा ने अलग अलग संप्रदाय के लोगों को नजदीक लाने का काम किया है। मनोविज्ञान विभाग की हेड प्रोफेसर सविता शीतल कहा की उर्दू अदब में प्रेम हर जगह देखने को मिलता है। उर्दू ने जो तहजीब हमें सिखाई है उसी तहजीब की बुनियाद पर हमारी राष्ट्रीय एकता में मजबूती देखने को मिलता है। सेमिनार में छात्र माजदा खातून को कक्षा में शत प्रतिशत उपस्थिति के लिए प्रोफेसर शाने अहमद सिद्दीकी एजुकेशनल अवार्ड दिया गया। विद्यार्थियों की ओर से सेमिनार को हम्माद अशरफ, इकबाल रजा, निखाल परवीन, हुस्ने आरा, तोहरा फातिमा, गुलाम मोइनुद्दीन, दानिश अख्तर, राजा, गुलफ्शा परवीन, ओबैदुल रहमान थे। मंच संचालन मोहम्मद सोहेल ने किया।

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