दूसरे संकाय की शोध प्रविधि का करें उपयोग
विनोबा भावे विश्वविद्यालय में अंतर्विषयक शोध और शोध प्रविधि विषय पर सात दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला प्रारंभ हुई। आयोजन स्नातकोत्तर मानव विज्ञान विभाग और भारतीय मानवविज्ञान सर्वेक्षण, संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार के संयुक्त तत्वावधान किया गया है। े 50 शोधार्थी कार्यशाला में झारखंड, बिहार और बंगाल के विश्वविद्यालयों से पहुंचे हैं। मुख्य अतिथि इमिरेटस प्रोफेसर विजय शंकर सहाय थे। उद्घाटन सत्र में विषय प्रवेश कराते मानव विज्ञान विभाग के हेड डॉ गंगानाथ झा ने बताया कि शोध के माध्यम मिले ज्ञान का आदान प्रदान विश्व के सभी विश्वविद्यालयों में किया जाता है। समस्याओं का समाधान सुझाने वाले शोध में गुणवत्ता, विश्वसनीयता कायम रखने के लिए वैश्विक स्तर पर शोधार्थी दूसरे विषयों की शोध प्रविधियों और ज्ञान का भी इस्तेमाल करते हैं। इससे ज्ञान का संवर्धन के साथ शोध की विश्वसनीयता बढ़ती है। समकालीन शोध की चुनौतियों का सामना करने के लिए अंतर्विषयक शोध प्रविधि बेहतर समाधान साबित हो रहा है। शोधार्थियों को शोध के मूल तत्वों से अवगत कराने के लिए कार्यशाला आयोजित की गई है। उन्होंने बताया कि प्रशिक्षुओं को शोध, सर्वेक्षण, प्रकार आंकड़ा विश्लेषण सहित अन्य बिंदुओं के साथ जनजातीय ग्राम अध्ययन के लिए फील्ड एक्सपोजर भी कराया जाएगा। उद्घाटन समारोह को संबोधित करते डॉ विजय शंकर सहाय ने कहा कि शोध में गुणवत्ता के ह्रास का कारण मैथडोलॉजी को सही से नहीं समझ पाना है। भारत के 45 से अधिक विश्वविद्यालयों में मानवविज्ञान की पढ़ाई हो रही है। शोध हो रहे हैं, लेकिन उनसे कोई नई अवधारणा सामने नहीं आ रही। वीसी डॉ रमेश शरण ने कहा कि हम एक दूसरे के विषयों के बारे में बहुत कम जानते हैं या जानने की इच्छा नहीं रखते। दूसरे संकाय के शोध के तरीकों को नहीं जानते। अच्छा शोधकर्ता बनने के लिए दूसरे संकाय की शोध प्रविधि का इस्तेमाल कर सीख सकते हैं। शोध में चुनौती के साथ सीखने का अवसर भी मिलता है। दुनिया तेजी से बदली है। प्रिंटिंग प्रेस, मोबाइल ने ज्ञान के प्रसार की अवधारणा को बदल दिया है।