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सिविल अस्पताल के 132 कर्मचारी कांट्रेक्ट रिन्यू न होने पर काम छोड़ धरने पर बैठे, ढाई घंटे काम ठप

3 वर्ष पहले
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सिविल अस्पताल में कांट्रेक्ट पर लगे आउटसोर्सिंग कर्मचारी कांट्रेक्ट रिन्यू न होने के कारण बुधवार को काम छोड़कर धरने पर बैठ गए। सिविल अस्पताल में 132 कर्मचारी कांट्रेक्ट पर काम कर रहे थे। इनका 15 मई को टेंडर पूरा हो गया। मगर अस्पताल प्रशासन की ओर से न तो नया टेंडर दिया गया और न ही पुराने टेंडर को रिन्यू किया गया। इसके कारण बुधवार सुबह से कर्मचारी काम छोड़कर अस्पताल के गेट, सीएमओ ऑफिस व कैंटीन के सामने धरने पर बैठ गए। इस दौरान कर्मचारियों ने नारेबाजी भी की। पीएमओ ने कर्मचारियों को टेंडर रिन्यू होने तक डीसी रेट उपलब्ध करवाने का आश्वासन दिया। मगर कर्मचारी अपनी बात पर अड़े रहे। पीएमओ के कमेटी बनाकर कर्मचारियों की पीएफ की समस्याएं सुलझाने व लिखित तौर पर डीसी रेट उपलब्ध करवाने के आदेश पर कर्मचारी धरने से उठे। कर्मचारियों ने इनके साथ-साथ पीएफ नंबर देने व बकाया एरियर देने की भी मांग की। सिविल अस्पताल में धरने पर बैठे कर्मचारियों ने कहा कि अस्पताल की ओर से टेंडर को रिन्यू नहीं किया गया। इसलिए वो काम नहीं करेंगे। कर्मचारियों में गार्ड, स्वीपर, वार्ड सर्वेंट, इलेक्ट्रीशियन, ओपीडी काउंटर कर्मी, कंप्यूटर ऑपरेटर आदि कर्मचारी शामिल हैं। ये कर्मचारी ठेकेदार के अंडर काम करते हैं। कांट्रेक्ट हर साल रिन्यू किया जाता है। इस वर्ष कर्मचारियों का कांट्रेक्ट 15 मई तक था। मगर अस्पताल प्रशासन की अोर से कांट्रेक्ट आगे न बढ़ाने पर कर्मचारियों ने धरना शुरू कर दिया।

ये आईं समस्याएं

आधे मरीजाें को वापिस लौटना पड़ा। प्रतिदिन 1500 के करीब नई पर्चियां व पुरानी पर्चियों को रिन्यू किया जाता है। मगर कर्मचारियों की हड़ताल के कारण सिर्फ एक हजार के करीब पर्चियां काटी गई। इनमें से नई पर्चियां सिर्फ 500 के करीब थी। जबकि रोजाना 1200 के करीब नई पर्चियां बनाई जाती हैं।

अस्पताल में सफाई व्यवस्था प्रभावित रही। सभी वार्डों में सफाई नहीं हुई।

अस्पताल के गेट पर गार्ड नहीं थे, जिस कारण अस्पताल में अव्यवस्था फैली रही।

अस्पताल के गेट पर वाहनों की कतारें लगी रही। आमतौर पर वाहनों को पार्किंग में खड़ा करवाया जाता है।

पिछले साल भी कटा था 23 दिन का वेतन

चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी संघ की प्रधान सोना देवी ने कहा की उन्हें आज तक पीएफ नंबर नहीं दिया गया। जबकि सभी कर्मचारियों का पीएफ काटा जा रहा है। सोना देवी ने बताया कि पिछले साल भी नया टेंडर होने तक कर्मचारियों ने 23 दिन ड्यूटी की। मगर अस्पताल प्रशासन की ओर से उन्हें इन दिनों की सैलरी नहीं दी गई। उन्होंने आरोप लगाया कि उनसे 8 घंटे की बजाय 12 घंटे काम करवाया जा रहा है।

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