ढंढूर के सरपंच बेदी से बोले
मंत्री जी, मिर्चपुर गांव के पीड़ित ढंढूर गांव में अाएं, उनका स्वागत है, लेकिन इस गांव में रहने वाले ढाई हजार लोगों के लिए पहले मूलभूत सुविधाएं भी उपलब्ध करवाएं। मंत्री जी ने भी डीसी को कहा, पंचायत को इगनोर न करें और उनकी भी बात सुनी जाए। यह डायलॉग गांव ढंढूर में उस समय के हैं जब सामाजिक न्याय एवं आधिकारिता मंत्री कृष्ण कुमार बेदी तथा पंचायत सदस्य आमने-सामने हुए। कृष्ण कुमार बेदी शुक्रवार दोपहर बाद ढंढूर गांव पहुंचे और मिर्चपुर के पीड़ितों को जमीन देने की घोषणा की।
मंत्री के अभिनंदन समारोह के बाद स्वयं मंत्री बेदी, उपायुक्त अशोक मीणा व अन्य अधिकारी पीड़ितों को दी जाने वाली दस एकड़ जमीन का मुआवना करने गांव के बाहर गए तो वहां पहले से ही मौजूद सरपंच मनोज शर्मा तथा अन्य पंचायत प्रतिनिधि ज्ञापन लेकर खड़े थे। उन्होंने मंत्री कृष्ण बेदी को ज्ञापन सौंपते हुए कहा कि गांव में अढाई हजार परिवारों की आबादी है। लेकिन पीने का पानी पांच सौ लोगों को भी नहीं मिल पा रहा है। गांव में शमशान घाट नहीं है। पार्क व धर्मशाला भी गांव में अभी तक नहीं बने। जब गांव के साथ लगती जमीन पर 254 परिवारों को बसाया जाएगा तो ये भी इस गांव की पंचायत का हिस्सा होंगे। सरपंच मनोज ने कहा कि मिर्चपुर पीड़ित को जब इस सरकारी जमीन से दस एकड़ हिस्सा दिया जा रहा है तो गांव की सुविधा के लिए भी इसमें से कुछ जमीन दी जाए।
मंत्री ने पंचायत की बात सुनने के बाद साथ खड़े उपायुक्त अशोक मीणा से कहा कि डीसी साहब पंचायत को इगनोर मत करना, उनकी बात भी अवश्य सुनी जाए।
चिंता न करो, चिनाई लगवा के ही यहां से जाऊंगा
पीड़ितों का स्वागत पर ढंढूर को सुविधाएं तो दें
ढंढूर लाइव
सामाजिक न्याय एवं आधिकारिता मंत्री कृष्ण बेदी ने ढंढूर गांव के पंचायत घर में मिर्चपुर पीड़ितों को संबोधित करते हुए कहा कि वह समाज के लोगों से झोली फैलाकर भीख मांग रहा हूं कि वे आने वाले चुनाव में भाजपा का ध्यान रखंे। जिस तरह सरकार ने उनका ध्यान रखा है, उसी तरह वे भी अागामी चुनाव में इस पर सरकार अौर पार्टी में अपना विश्वास जरूर बनाए रखें।
अब सीएम के साथ एक साल 4 महीने जागना
मंत्री कृष्ण कुमार बेदी ने कहा कि मुख्यमंत्री मनोहर लाल मिर्चपुर पीड़ितों के पुर्नवास की चिंता में एक साल 4 महीना नहीं सोये। अब वह उनसे हाथ जोड़कर आग्रह करेंगे कि वे भी अगले 1 साल 4 महीने तक मुख्यमंत्री मनोहर लाल के साथ जागें।
पुनर्वास के लिए जमीन देने का किया ऐलान और झोली फैला बोले- पार्टी का रखना ध्यान
पुर्नवास को लेकर सवाल उठाने लगे तो मंत्री जोश में आ गए
सामाजिक न्याय एवं अाधिकारिता मंत्री बेदी के सामने मिर्चपुर कांड के कुछ पीड़ित पुर्नवास पर संशय को लेकर सवाल उठाने लगे तो मंत्री जोश में आ गए। बेदी ने कहा कि तुम किसी प्रकार की चिंता न करो। वे जमीन की प्रक्रिया पूरी होते ही दोबारा आएंगे। जब मकान बनाने का काम शुरू होगा तो वे यहां खड़े होकर चिनवाई करवाएंगे और सभी पीड़ितों का पुर्नवास करवा ही दम लेंगे।
मिर्चपुर छोड़ने वालों को 8 साल बाद ढंढूर में मिली 10 एकड़
मैंने खेड़े की जगह छुड़वा दी है, अफसरों काे नहीं पता था
मंत्री कृष्ण कुमार बेदी जब मिर्चपुर पीड़ितों की डिमांड सुन रहे थे तो उन्होंने कहा जवाब देते हुए कहा कि उन्होंने खेड़े की जगह भी छुड़वा दी है। अफसरों को इस बात का पता नहीं था। साथ ही उन्होंने कहा कि आंगनवाड़ी, स्कूल, मंदिर और अन्य जरूरत की जगह भी छुड़वा देंगे।
...और भावुक होकर बोले- घटना का पता चलते ही पहुंच गया था
अपना संबोधन में मंत्री कृष्ण बेदी भावुक हो गए। उन्होंने उपस्थित पीड़ितों व पंचायत घर में मौजूद भाजपा नेताआें जवाहर यादव, ओएसडी भूपेंद्र सिंह,कर्णसिंह राणोलिया व चेयरमैन ज्योति बैंदा की ओर मुखातिब होते हुए कहा कि जब उन्होंने इस घटना को सुना तो वह रोने लग गए। इस प्रकरण पर जब दूसरी बार पीड़ितों पर हमला हुआ तो वह पिछले साल 31 जनवरी को सर्दी की रात में हिसार पहुंचे और पुलिस लाइन गेस्ट हाउस में पीड़ितों की बात सुनी। वह रात 12 बजे तक परिसर में रहे और बसों में पीड़ितों को बैठाकर स्वयं रवाना किया था। बेशक आज इस घटना को 10 साल हो चुके हैं, लेकिन आज भी उनका दर्द सुनकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं।
टोपी आले, पंजे आले और हरे-लाल नीले झंडे वाले थारै बीच आवैंगे
मंत्री ने पीड़ितों को साफ संदेश देते हुए विपक्ष पर हमला साधा। उन्होंने आप, कांग्रेस, इनेलाे, बसपा और माकपा पर निशाना साधते हुए कहा कि चुनाव सिर पर हैं। अब उनके बीच तरह-तरह के नेता आएंगे और उन्हें बहकाने का प्रयास करेंगे। लेकिन उन्हें ध्यान रखना होगा कि जिस तरह सीएम मनोहर लाल ने उन्हें तवज्जो दी है, उसी तरह उनका भी पूरा साथ देना। तंवर, शैलजा व अन्य नेताओं के बहकावे में नहीं आना है।
कांड के बाद मिर्चपुर में 30-40 परिवार ही बचे हैं
बहुचर्चित मिर्चपुर कांड 21 अप्रैल 2010 को हुआ। दबंगों की भीड़ ने बाल्मीकि बस्ती में तोड़फोड़, मारपीट और आगजनी की। आगजनी में करीब 55 साल के तारा चंद और उनकी दिव्यांग बेटी 19 वर्षीय सुमन की मौत हो गई। 18 मकान जल गए और करीब 50 लोग घायल हुए।
घटनाक्रम को लेकर पुलिस ने 130 लोगों पर मामला दर्ज किया। मामले की तफ्तीश में 27 लोगों के नाम कट गए और 103 रह गए, जिनमें पांच नाबालिग थे। तत्कालीन थाना प्रभारी को भी आरोपी बनाया गया। अगले साल यानी 2012 की शुरुआत में मिर्चपुर से पलायन शुरू हो गया। सरकार और प्रशासन ने पलायन रोकने के तमाम प्रयास किए। मिर्चपुर में पुलिस चौकी तक बनाई गई।
कूण-कचूण की बात ना करयो, एक बै बस पैर जमा ल्यो
मंत्री ने बैठक के दाैरान साफ तौर पर पीड़तों का आह्नान किया कि जब मकान आंवटन की बात आए तो कोई ये मुददा न उठाए कि उन्हें तो कूण-कचूण में मकान मिला है। एक बार पांव जमा लेना, बाद में देख लेंगे। सभी की सुविधाओं का ध्यान रखा जाएगा। बीपीएल व दूसरी सुविधाओं को भी लागू करवा दिया जाएगा।
तारीफ करते हुए कहा, डीसी साहब से अत्यंत प्रभावित हूं
ढंढूर गांव के पंचायत घर में मौजूद उपायुक्त अशोक मीणा की ओर मुखातिब होते हुए मंत्री कृष्ण बेदी ने उनकी जमकर तारीफ की। बेदी ने कहा कि हरियाणा में कई अधिकारी बेहतर और सर्वश्रेष्ठ हैं। इनमें से एक अशोक मीणा भी हैं। वह न केवल सुलझे हुए अधिकारी है अपितु प्रत्येक कार्य में इंसाफ करते हैं अौर समस्याओं व लोगों की कठिनाईयों को सुनकर समाधान करवाते हैं।
सुरक्षा के लिए केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती की गई। मगर पलायन नहीं रुका। मामले में दिल्ली की रोहिणी कोर्ट 15 लोगों को सजा सुना चुकी है। तीन को उम्रकैद, पांच को पांच-पांच साल कैद और सात को दो-दो साल कैद की सजा हुई है। हालात सामान्य होने के बावजूद समुदाय के लोग वापस लौटने के लिए तैयार नहीं है। बड़ी संख्या में बाल्मीकि परिवार हिसार में तंवर फार्म हाउस में रह रहे हैं। कुछ आदमपुर और कुछ पंजाब चले गए हैं। 30 से 40 परिवार हालांकि अभी गांव में रह रहे हैं।