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फील्ड स्टाफ को मिलेंगे टैब, टीबी मरीज ने दवा ली या नहीं, डेटा रखेंगे दुरुस्त

3 वर्ष पहले
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टीबी ग्रस्त मरीजों का रिकॉर्ड ऑनलाइन होगा। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग के फील्ड स्टाफ को टैब दिए जाएंगे। यह व्यवस्था प्रदेश के सभी जिलों में शुरू होगी, ताकि मरीजों को टीबी से मुक्ति दिलाने के लिए ट्रैक किया जा सके। फील्ड स्टाफ एक-एक मरीज की जानकारी को विभाग के पोर्टल पर अपडेट करता रहेगा। अगर मरीज ने दवा का सेवन नहीं किया या किसी कारणवश दवा खानी ही छोड़ दी है तो उसकी भी मॉनिटरिंग करके पुन: इलाज शुरू करवाया जाएगा।

बता दें कि हिसार में अत्यंत गंभीर टीबी ग्रस्त मरीजों की संख्या 90 है। स्वास्थ्य विभाग का अभी इन पर फोकस है। विभाग के अनुसार सीनियर ट्रीटमेंट सुपरवाइजर और सीनियर ट्रीटमेंट लैब सुपरवाइजर को टैब दिए जाएंगे, जोकि सरकारी-गैर सरकारी अस्पतालों में जाकर टीबी ग्रस्त मरीजों की पुष्टि होने पर उनका रिकॉर्ड ऑनलाइन अपडेट करेंगे। दूसरे चरण में हेल्थ विजिटर, डॉट्स प्लस सुपरवाइजर, लैब टेक्नीशियन और डेटा आॅपरेटर को टैब दिए जाएंगे।

यह होगा फायदा

जिन मरीजों ने टीबी बीमारी से निजात पाने की दवा का सेवन करना छोड़ दिया है या नियमित सेवन नहीं कर रहे हैं उनकी काउंसलिंग संभव होगी। स्वास्थ्य विभाग की टीम उनके घर जाकर केस स्टडी करके दोबारा दवा का सेवन करवाएगी। इसके साथ ही मरीज के परिजनों को जागरूक करेगी।

यह सुविधा टीबी ग्रस्त मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवा देने के लिए शुरू हो रही है। इन मरीजों का डेटा ऑनलाइन होगा। स्वास्थ्यकर्मियों को टैब देंगे, जोकि फील्ड में जाकर गंभीर मरीजों की पहचान कर उनका डेटा ऑनलाइन पोर्टल पर दर्ज करेंगे।।\\\'\\\' -डाॅ. जौहर, डिप्टी सीएमओ, टीबी विभाग।

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