डाॅ. अाम्बेडकर के बनाए संविधान ने देश को एकता के सूत्र में पिरोया : डाॅ. चहल
सर्वोदय भवन में डाॅ. भीमराव अाम्बेडकर के कार्यों की समीक्षा विषय पर आयोजित संगोष्ठी में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग के चेयरमैन डाॅ. एसके चहल ने बतौर मुख्यअतिथि शिरकत की।
मंच संचालन जयभगवान लाडवाल ने किया। संगोष्ठी में डाॅ. चहल ने बताया कि संविधान निर्माण के समय डाॅ. भीमराव अाम्बेडकर की संविधान ड्राफ्ट कमेटी के अध्यक्ष के तौर पर निभाई गई भूमिका ने उनको संविधान निर्माता बना दिया। डाॅ. अाम्बेडकर ने तत्कालीन राष्ट्रपति व पीएम से कहा कि अच्छे लोगों के हाथों में संविधान होगा तो अच्छा होगा और बुरे लोगों के हाथों में इसको सौंपा गया तो इसके परिणाम बुरे होंगे। डाॅ. अाम्बेडकर कहते थे कि हम भारतीय हैं और भारतीय ही रहेंगे। भारतीयों के अलावा कुछ नहीं। डाॅ. अाम्बेडकर एक मजदूर नेता थे जिन्होंने लेबर पार्टी बनाई। वो एक समाज सुधारक भी थे। शिक्षा के क्षेत्र में चार पीएचडी की डिग्री व एक लॉ की डिग्री उन्होंने हासिल की।
डाॅ. चहल ने बताया कि डाॅ. अाम्बेडकर ने पानी के लिए सत्याग्रह भी किया और कहा कि यह कैसा देश है जहां जानवर पानी पी सकता है, लेकिन इंसान नहीं। नासिक के मंदिर में शुद्रों के प्रवेश पर प्रतिबंध था, उन्होंने संघर्ष कर उसको दलितों के लिए खुलवाया। अाम्बेडकर एक श्रमिक नेता थे। इसलिए उन्होंने श्रमिकों के लिए काम के घंटे निश्चित करवाए। कृषि के क्षेत्र में भूमि सुधार के कार्य किए और कहा कि भूमिहीनों को भूमि मिलनी चाहिए।
पैसे की समस्या के लिए रिजर्व बैंक की स्थापना में भी उन्होंने अहम भूमिका निभाई। इस अवसर पर डाॅ. महेंद्र सिंह, डाॅ. इंद्रजीत, जयभगवान लाडवाल, एमसी मनचंदा, विजेंद्र सभ्रवाल, जय सिंह रावत, विरेंद्र कौशल, चंचल आदि भी उपस्थित रहे।