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महिलाएं बोलीं-बाहर ही नहीं घर में भी खतरा छठी से ही जूडो कराटे ट्रेनिंग कोर्स शुरू हो

3 वर्ष पहले
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सीएम के एक और सुधार प्रोजेक्ट को लेकर सोमवार को लघु सचिवालय में महिलाओं के लिए सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन का उद्देश्य महिलाओं से जुड़ी सुविधाओं की बेहतरी को लेकर उनके विचारों का जानना था। इस मौके पर प्रोजेक्ट के प्रभारी रॉकी मित्तल को सर्वे में शामिल महिलाओं ने बताया कि अब खतरा बाहर ही नहीं बल्कि उनके घर में भी है। सुरक्षित रहने के लिए खुद को ही सशक्त बनाना होगा। इसके लिए वह कक्षा 6 से ही कोर्स में जूडो कराटे की ट्रेनिंग को जुड़वाना चाहती हैं।

सरकार प्रदेश में पहली बार महिलाओं को सर्वे में शामिल कर उनके विचारों की डॉक्यूमेंट्री बना रही है। सर्वे में महिलाओं ने रोजाना की दिक्कतों को साझा किया है। इसमें परिवारों में संस्कारों के कम होने से लेकर बसों में यात्रा करने पर रिजर्व सीट होने पर भी सीट न मिलने जैसी परेशानियां शामिल हैं। कार्यक्रम के तहत प्रदेश के 20 जिलों की 600 महिलाएं सुझाव साझा कर चुकी हैं। इस मौके पर एएसपी राजेश कुमार, डीएसपी सिद्धार्थ ढांडा व अन्य मौजूद रहे।

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लघु सचिवालय में आयोजित सम्मेलन में महिलाओं ने बयां की राेजमर्रा की समस्याएं

एक और सुधार कार्यक्रम के तहत लघुसचिवालय के सभागार में आयोजित सम्मेलन में अपने सुझाव रखती एक युवती।

सम्मेलन में महिलाओं ने यह दिए सुझाव

रोजगार अधिकारी एकता भ्याण ने कहा कि दिव्यांग व्यक्तियों की समस्या को ध्यान में रखते हुए विभिन्न संस्थानों में रैंप की सुविधा होनी चाहिए। ताकि दिव्यांगों को रूटीन में आने वाली समस्याओं से निजात मिल सके।

एसडी महिला कॉलेज की ज्योति ने कहा कि हर स्कूल-कॉलेज में कानूनी साक्षरता शिविरों का आयोजन कर महिलाओं व लड़कियों को उनके कानूनी अधिकारों के बारे में जानकारी दी जाए।

एसडी महिला कॉलेज की पूनम ने कहा कि प्रत्येक कॉलेज में महिला सहायता डेस्क की स्थापना की जानी चाहिए। जहां पर महिला अधिकारी की ही ड्यूटी हों, ताकि महिलाएं बेझिझक अपनी शिकायत दर्ज करवा सकें।

कराटे कोच विजेता ने कहा लड़कियों को आत्म सुरक्षा के लिए कराटे आदि की ट्रेनिंग दी जाए। इसके अलावा लड़कियों को चाहिए कि वे अपने लक्ष्य को ही केंद्र बिंदु बनाकर आगे बढ़ें।

सरिता महतानी ने कहा कि कानूनी जानकारी वाले पोस्टर विभिन्न स्थानों पर चस्पा किए जाने चाहिए, जिनसे आम जनता को उनके कानूनी अधिकारों के बारे में जानकारी मिले सके।

एक और सुधार प्रोजेक्ट के प्रभारी रॉकी मित्तल बताते हैं कि उन्होंने 20 जिलों में सर्वे कर लिया है। दो जिले अभी बाकी हैं। उन्होंने बताया कि कई जगह महिलाओं ने बताया कि जब मदद के लिए थानों में फोन करती हैं तो फोन रिसीव करने वाले की बातचीत का लहजा महिलाओं के प्रति सही नहीं होता है।

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