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अमरूद के बाग लगाकर किसान की हो रही पौ बारह

3 वर्ष पहले
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राकेश कुमार | गढ़ी बीरबल (करनाल)

किसानों का रूझान अब बागवानी की ओर बढ़ रहा है। जिसमें अमरूद के बाग लगाने में किसान ज्यादा रूचि लेने लगे हैं। क्योंकि अमरुद के बाग किसानों के लिए अच्छी खासी आमदनी का जरिया बन रहे है। इस तरह के बागों में लगाए गए अमरूद विभिन्न किस्मों के होते हैं। जिनके पौधों में ड्रीप द्वारा पानी दिया जाता है। यदि उचित देखभाल की जाए तो पेड़ों से काफी मात्रा में फल प्राप्त हो जाता है। अमरूद की लखनऊ 49 किस्म अमरुद का ऐसा ही एक बाग गांव बुटानखेड़ी में किसान ने दो एकड़ में लगाया हुआ है। यह अमरुद की किस्म खाने में भी स्वाद होता है और इसकी क्वालिटी भी लाजवाब होती है। जिस के चलते इसकी मांग भी ज्यादा है।

विभाग से ये मिलता है लाभ: वही बागवानी विभाग की तरफ से किसान को बाग लगाने के लिए सरकार द्वारा अनुदान दिया जाता है। पहले साल 4600 रुपए/ एकड़। दूसरे साल देखरेख के लिए 1533 और तीसरे साल भी 1533 रूपए की अनुदान राशि बाग लगाने के लिए सरकार देती है।

बढिया दाम पर बिकता है बाजारों में अमरूद: क्षेत्रीय किसान सुभाष ने बताया कि उसने 2 साल से बाग लगा रखा है। जिसमें अमरूद के लखनऊ 49 किस्म के पेड़ लगाए हुए हैं। वहीं साथ ही बाग में पौधों की सही समय पर नलाई गुड़ाई करते हैं। तथा पानी और खाद ड्रीप के द्वारा देते हैं। समय समय पर बागवानी अधिकारी भी उनके मार्गदर्शन के लिए यहां बाग में आते रहते हैं। किसान ने बताया कि इस किस्म के अमरुद की फसल उन्हे साल में दो बार मिलती हैं। वहीं इंद्री के किसान संत कुमार ने ड़ेढ़ एकड़ में, जंझेड़ी के रवि प्रताप व दादूपुर के दोमेश आदि किसानों अपने यहां इलाहाबाद किस्म का दो-दो एकड़ में अमरूद के बाग लगा रखे हैं। किसानो के अुनसार इस वरायटी का अमरूद बाजार में बढ़िया दामों पर बिकता है।

अमरूद की उत्तम किस्में

हिसार सफेदा, हिसार सुरख, इल्हाबाद सफेदा आदि किस्में हरियाणा की जलवायु के अनुकूल है। एक एकड़ में 110 पौधे लगाए जाते है। एल 49 लखनऊ किस्म की अमरुद की किस्म में क्वालिटी भी गुणवक्ता पूर्ण होती है। एक एकड़ में 700 से 800 क्विंटल फल मिल जाता है।

ऐसे करें देखभाल

डाॅक्टर धर्मपाल सैनी ने बताया कि आमतौर पर इस अमरुद की इस वरायटी पर विल्ट ज्यादा नही आती है। जिसको उक्था रोग भी कहते। यह रोग जडो को रोगग्रस्त कर देता है। जिससे पौधा सुखने लगता है। मार्च, जून व सितम्बर के अंदर 15 ग्राम बैवस्टीन पौधों की जड़ो में पानी के साथ दे देना चाहिए। मार्च व सितंबर में 0.3 प्रतिशत जिंकसल्फेट का पूरे बाग में स्प्रे करे। फल मक्खी का प्रकोप ज्यादा हो तो बाग में 5 सौ मि.ली. मेंलाथियान (50 इ.सी.) व 5 किग्रा. गुड 500 लीटर पानी में घोलकर/एकड़ के हिसाब से स्प्रे करे। 15 दिन बाद फिर दोहराए।

राकेश कुमार | गढ़ी बीरबल (करनाल)

किसानों का रूझान अब बागवानी की ओर बढ़ रहा है। जिसमें अमरूद के बाग लगाने में किसान ज्यादा रूचि लेने लगे हैं। क्योंकि अमरुद के बाग किसानों के लिए अच्छी खासी आमदनी का जरिया बन रहे है। इस तरह के बागों में लगाए गए अमरूद विभिन्न किस्मों के होते हैं। जिनके पौधों में ड्रीप द्वारा पानी दिया जाता है। यदि उचित देखभाल की जाए तो पेड़ों से काफी मात्रा में फल प्राप्त हो जाता है। अमरूद की लखनऊ 49 किस्म अमरुद का ऐसा ही एक बाग गांव बुटानखेड़ी में किसान ने दो एकड़ में लगाया हुआ है। यह अमरुद की किस्म खाने में भी स्वाद होता है और इसकी क्वालिटी भी लाजवाब होती है। जिस के चलते इसकी मांग भी ज्यादा है।

विभाग से ये मिलता है लाभ: वही बागवानी विभाग की तरफ से किसान को बाग लगाने के लिए सरकार द्वारा अनुदान दिया जाता है। पहले साल 4600 रुपए/ एकड़। दूसरे साल देखरेख के लिए 1533 और तीसरे साल भी 1533 रूपए की अनुदान राशि बाग लगाने के लिए सरकार देती है।

बढिया दाम पर बिकता है बाजारों में अमरूद: क्षेत्रीय किसान सुभाष ने बताया कि उसने 2 साल से बाग लगा रखा है। जिसमें अमरूद के लखनऊ 49 किस्म के पेड़ लगाए हुए हैं। वहीं साथ ही बाग में पौधों की सही समय पर नलाई गुड़ाई करते हैं। तथा पानी और खाद ड्रीप के द्वारा देते हैं। समय समय पर बागवानी अधिकारी भी उनके मार्गदर्शन के लिए यहां बाग में आते रहते हैं। किसान ने बताया कि इस किस्म के अमरुद की फसल उन्हे साल में दो बार मिलती हैं। वहीं इंद्री के किसान संत कुमार ने ड़ेढ़ एकड़ में, जंझेड़ी के रवि प्रताप व दादूपुर के दोमेश आदि किसानों अपने यहां इलाहाबाद किस्म का दो-दो एकड़ में अमरूद के बाग लगा रखे हैं। किसानो के अुनसार इस वरायटी का अमरूद बाजार में बढ़िया दामों पर बिकता है।

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