बेलनुमा एक औषधीय लता है गुड़मार। काष्ठयुक्त रोएंदार इस लता के पत्ते गुणकारी हैं और खेती अति लाभकारी। कई तरह की बीमारियों में यह एक दवा है। खास कर मधुमेह और लिवर संबंधी समस्याओं में इसे बेहद कारगर माना जाता है। इसे मधुमेह का दुश्मन और लिवर का टॉनिक भी कहते हैं। इसमें शर्करा विरोधी तत्वों जिमनेमिक एसिड एबीसी है, इसीलिए यह औषधीय गुण वाल है। इस पर पीले भड़कीले फूलों के गुच्छे लगते हैं। इसकी पत्तियां 5 से 7 सेंटीमीटर लंबी होती हैं। इसके पत्ते चबाने से मुंह का स्वाद थोड़ी देर के लिए समाप्त हो जाता है। इसलिए इसे गुड़मार कहा जाता है। गुड़मार की खेती कर किसान इसे निर्यात कर सकते हैं। पिछले कुछ वर्षों में लगातार इसका निर्यात बढ़ रहा है।
पत्तियां ही नहीं जड़ भी औषधि
एचएयू के औषधीय, सगंध एवं क्षमतावान फसलें संभाग की मानें तो इसे औषधि के रूप में प्रयोग करते हैं। सिर्फ मधुमेह या लिवर ही नहीं डायरिया, पेचिश, पेट दर्द आदि में उपयोग किया जा सकता है। खास बात है कि गुड़मार के पत्ते ही नहीं बल्कि इसकी जड़ों से भी काफी फायदे होते हैं। इसकी जड़ों का प्रयोग वात रोग, पुराने बुखार में काफी लाभदायक होता है।
लीवर टॉनिक और डाइबिटीज में फायदेमंद गुड़मार के पत्ते
हल्की दोमट मिट्टी में उगा सकते हैं
गुड़मार को हर प्रकार की मिट्टी में देश में कहीं भी उगाया जा सकता है। इसके लिए हल्की दोमट मिट्टी ज्यादा अच्छी होती है। इसकी खेती में जल निकासी अच्छी हो, यह जरूरी है। अभी इसकी खेती जंगलों में से एकत्रित किए गए पौधों से ही की जाती रही है। इसे बीज व कलम दोनों से लगाना संभव है। इसके ताजा बीज जनवरी माह में एकत्रित किए जाते हैं। इसके बाद इन्हें नर्सरी में 10 बाई 10 सेंटीमीटर की दूरी पर लगाया जाता है। इसमें लगभग सप्ताह भर के बाद अंकुरण शुरू होता है। जब नर्सरी में पौधों की ऊंचाई 15 सेंटीमीटर हो जाएं तो उन्हें पॉलीथिन में लगा देना चाहिए। इसकी कलम लगाने के लिए फरवरी मार्च तथा सितंबर अक्टूबर का समय उचित होता है। बेलनुमा पौधा होने के कारण इसके लिए बांस या किसी सहारे की आवश्यकता होती है।
उत्पादन: 1 एकड़ में 12 क्विंटल पत्ते
इसके पत्तों की औसत उपज 10 से 12 क्विंटल प्रति एकड़ आंकी गई है। इसके पत्ते एक वर्ष बाद तोड़ने के लिए तैयार हो जाते हैं। पत्तों को अक्टूबर से फरवरी तक तोड़कर साफ करने के बाद छाया में सुखाएं। जड़ों को अप्रैल मई में उखाड़ना चाहिए। जड़ों को धोकर साफ करके छोटे-छोटे भागों में बांटकर सुखाना चाहिए। इसको प्लास्टिक के थैलों में रख सकते हैं।
खेती के लिए सिंचाई प्रबंधन
इसकी खेती के लिए लगभग 5 टन प्रति एकड़ गोबर की गली सड़ी खाद पर्याप्त रहती है। इसे अधिक पानी की आवश्यकता नहीं पड़ती। गर्मी के दिनों में 15 दिन में तो सर्दी में 25 दिन में सिंचाई करनी चाहिए। पौधे लगाने के 25 दिन बाद पहली और 30 दिन बाद दूसरी गुड़ाई करनी चाहिए।