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एक जून को लॉन्च होगी ई-पैमाइश एप, नहीं काटने पड़ेंगे चक्कर, रजिस्ट्रेशन होते ही मैसेज से मिलेगी जानकारी कब और कौन सी टीम करेगी पैमाइश

3 वर्ष पहले
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जिलावासियों को अब भूमि की पैमाइश के लिए लंबे इंतजार और अनाप-शनाप खर्च से मुक्ति मिलने जा रही है। यह संभव हुआ है नई टोटल सर्वे मशीन व ई-पैमाइश एप के माध्यम से। 1 जून तक ई-पैमाइश एप लॉन्च करने की तैयारी है। फिलहाल इसका परीक्षण चल रहा है। इसके लिए 7 लाख रुपये की कीमत की मशीन राज्यसभा सांसद डॉ. सुभाष चंद्रा ने अपनी सामाजिक संस्था के माध्यम से दी है। सीएसआर (कॉरपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी) योजना के तहत शुक्रवार को डीसी अशोक कुमार मीणा को उनके कार्यालय में नई टोटल सर्वे मशीन सौंपी। इस आधुनिक मशीन से भूमि की तेज गति से मार्किंग व पैमाइश की जा सकती है। टोटल सर्वे मशीन का संचालन डीआईटीएस (जिला सूचना प्रौद्योगिकी समिति) द्वारा किया जाएगा।

ज्यादा फीस से भी मिलेगी राहत

भूमि पैमाइश के कार्य करवाने के लिए आमजन को न केवल लंबा इंतजार करना पड़ता था बल्कि बाजार में निजी कंपनियों के माध्यम से बहुत ज्यादा फीस देकर पैमाइश करवानी पड़ती थी। आमजन को इस समस्या से निजात दिलाने के लिए जिले में दो नये कार्य किए गए हैं। पहला, यहां ई-पैमाइश एप तैयार किया है जिसे अगले 10 दिन में लॉन्च करने की योजना है। दूसरा जिले को नई टोटल सर्वे मशीन उपलब्ध हो गई है। डीसी ने बताया कि ई-पैमाइश एप किसी भी मोबाइल पर इंस्टॉल किया जा सकता है। इसके माध्यम से कोई भी व्यक्ति अपनी भूमि की पैमाइश के लिए रजिस्ट्रेशन करवा सकता है। रजिस्ट्रेशन होते ही उसे पंजीकरण संख्या मिल जाएगी और उसी समय उसे मोबाइल पर यह संदेश मिलेगा कि वरिष्ठता के आधार पर उसकी भूमि पैमाइश किस तारीख को किस टीम द्वारा की जाएगी। यह प्रणाली पूरी तरह से पहले आओ पहले पाओ के आधार पर कार्य करेगी और इससे किसी सिफारिशी व्यक्ति की पैमाइश पहले करने की आशंकाएं भी खत्म हो जाएंगी। इससे आवेदक को पैमाइश का दिन-समय पूछने के लिए चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे तथा उसे समयबद्ध व त्वरित सेवा मिल सकेगी। जिला सूचना विज्ञान केंद्र द्वारा तैयार करवाए गए इस एप का फिलहाल परीक्षण किया जा रहा है और इसे 1 जून तक जिला में लॉन्च करने की पूरी संभावना है।

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