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कर्मचारियों ने रोडवेज बसों को कार्यशाला से नहीं निकलने दिया, निजी बसों को अड्‌डे से निकाला

3 वर्ष पहले
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हिसार | आॅल इंडिया ट्रांसपोर्ट फेडरेशन के आह्वान पर राष्ट्रव्यापी हड़ताल के चलते मंगलवार को रोडवेज ने चक्का जाम किया। तड़के से ही रोडवेज की बसों को कार्यशाला के गेट से बाहर नहीं निकलने दिया। सुबह कर्मचारी अड्डे और कार्यशाला के बाहर एकत्रित होने शुरू हो गए तथा तलाकी गेट से प्रदर्शन करते हुए बस अड्डे के अंदर आ गए।

रोडवेज की संयुक्त संघर्ष समिति के डिपो प्रधान राजपाल नैन, राजेश शर्मा, राम सिंह बिश्नोई, सतपाल डाबला, बहादुर सण्डवा व रमेश माल के नेतृत्व में रात को ही सैकड़ों कर्मचारियों ने वर्कशाप के प्रांगण में पड़ाव डाल दिया था। प्रदर्शन में राजबीर बेनीवाल, सर्व कर्मचारी संघ के प्रधान सुरेन्द्र मान, पूर्व प्रधान राजबीर सिन्धु, रोडवेज कर्मचारी नेता रमेश सैनी, रूप सिंह, अजमेर सावंत, सूरजमल पाबड़ा, दयानंद सरसाना, राजबीर पेटवाड़, रमेश यादव, अरुण शर्मा, भागीरथ शर्मा, विकास कुण्डू, सुभाष ढिल्लो, महेंद्र माटा, कुलदीप शर्मा, संदीप जैनावास, बलबीर लोधर, दलीप सोनी, देशराज वर्मा व पवन कुमार आदि मौजूद रहे।

जाम से परेशान रहा शहर

रोडवेज का चक्का जाम होने के बाद निजी वाहन, कारें और ऑटो वालों ने सुबह से अड्डे के बाहर लम्बी लाइन लगा ली। तलाकी गेट से लेकर सिविल अस्पताल चौक तक बसों की दोनों और कतारें थीं। यातायात और सिटी पुलिस ने फोर्स का बंदोबस्त किया था। लेकिन बसें सुचारू रूप से बुधवार सुबह 4 बजे से ही चलेंगी। रोडवेज प्रशासन ने रात 8 बजे फतेहाबाद से हरिद्वार और दिल्ली जाने वाली बस को हिसार डिपो से रवाना किया। परिवहन मंत्री तथा यातायात विभाग के महानिदेशक से मंगलवार शाम को प्रदेशस्तरीय रोडवेज यूनियन नेताओं से बातचीत के बाद बेमियादी चक्का जाम टाल दिया गया।

निजी बसों में छतों पर सफर

रोडवेज की बसों का चक्का जाम होेेने के बाद निजी बसों की छत पर बैठकर सवारियां सफर करती िदखीं।

एक तो हड़ताल उपर तै बारिश...मंगलवार रोडवेज की हड़ताल के कारण एक महिला सिर पर सामान रखकर निजी बस की ओर जाते हुए। इसे दिल्ली जाना है।

उपर तै राम बरसण नै हो रहया... अड़ै ये बस कूण मैं ला दी..

हिसार| रोडवेज की बसों का चक्का जाम हजारों यात्रियों के लिए पूरे दिन सिरदर्द बना रहा। बेशक कर्मचारियों ने चक्का जाम का पहले ही ऐलान कर रखा था। मगर ज्यादातर आम आदमी इससे अनभिज्ञ थे। पाबड़ा के बुजुर्ग रामधन सामान लेकर अड्डा पहुंचे। वहां हल्की बारिश चल रही थी। बसों का चक्का जाम देखकर चौधरी साहब का माथा ठनका और बोले कि उपर तै यू राम बरसण नै हो रहया सै, अड़ै ये बसें कूण मैं ल्या दई। इसी तरह कई बुजुर्ग महिलाओं और बच्चों को परेशान होते देखा गया। निजी बसें कभी अंदर तो कभी बाहर आने जाने के कारण यात्री भी इधर उधर भटकते रहे।

बस अड्डा परिसर में अपनी मांगों को लेकर धरना प्रदर्शन करते रोडवेज कर्मचारी संघों के प्रतिनिधि।

हड़ताल के कारण सर्व कर्मचारी संघ के जिला प्रधान सुरेंद्र मान बस अड्डे के मुख्य गेट को बंद करते हुए।

ये हैं कर्मियों की मांगें

सरकार 700 निजी बसों किलोमीटर स्कीम के तहत चलाने के फैसले को वापस ले।

केन्द्र सरकार द्वारा लाए गए न्यू ट्रांसपोर्ट बिल को वापस ले कर संयुक्त संघर्ष समिति के नेताओं के साथ हुए समझौते को लागू करे।

ठेके पर बसें लेने के निर्णय को रद्द किया जाए।

मोटर व्हीकल एक्ट संशोधन बिल को वापस लिया जाए।

कर्मशाला सहित सभी रिक्त पदों पर पक्की भर्ती हो।

डीजल व पेट्रोल को जीएसटी के दायरे में लाया जाए।

निजीकरण, ठेका प्रथा व आउटसोर्सिंग की नीति बंद हो।

पुरानी पेंशन नीति लागू की जाए।

निजीकरण का इरादा छोड़ कर विभाग के बेड़े में 14 हजार बसें शामिल की जाए।

निजी वाहनों ने कूटी चांदी

सरकारी बसों का चक्का जाम होने के कारण निजी बसों व अन्य वाहनों ने चांदी कूटी। निजी बसें सवारियों को महम, रोहतक, दिल्ली, कैथल,अम्बाला, सिरसा, फतेहाबाद आैर सिरसा तक आ जा रही थीं।

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