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संघर्ष समिति का ऐलान : 15 अप्रैल से शहर में सफाई बंद संघ प्रधान बोले : किसी से नहीं हुई बात, सफाई करेंगे

3 वर्ष पहले
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आजाद नगर स्थित कबीर छात्रावास में शुक्रवार को अंबेडकर संघर्ष समिति के बैनर तले दलित संगठनों के पदाधिकारियों ने पत्रकारवार्ता का आयोजन किया। पदाधिकारियों ने कहा कि एससी-एसटी एक्ट में किए संशोधन को वापस नहीं लिया तो 15 अप्रैल से सफाई कर्मी काम छोड़ धरना-प्रदर्शन करेंगे।

वहीं, इस दावे के विपरीत नगर पालिका कर्मचारी संघ के प्रधान प्रवीण का कहना है कि जब मेरी किसी से बात नहीं हुई और न किसी ने बात करनी चाही तो सफाई कार्य बाधित क्यों रखेंगे। सफाई व्यवस्था सुचारू रहेगी। ऐसे में समिति व प्रधान का एकमत न होने पर नई बहस खड़ी हो गई है। वहीं, समिति के नेताओं ने पत्रकारवार्ता में आरोप लगाते हुए कहा कि भारत बंद के दौरान उपद्रव के लिए जिले के तीन डीएसपी पूरी तरह जिम्मेदार हैं। उनकी वजह से हालात बिगड़े थे। उस दिन शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन खत्म करके सभी घर लौट रहे थे। पुलिस कर्मियों ने रास्ते में ऑटो रिक्शा से नीचे उतारकर समाज की महिलाओं के साथ अभद्रता की। ऐसे में जब प्रकरण के बाद रात को सिटी थाना गए तो वहां मौजूद डीएसपी ने उनके साथ बदतमीजी की। इसके कारण माहौल बेकाबू हुआ था। इसलिए तुरंत प्रभाव से शासन-प्रशासन तीनाें डीएसपी को सस्पेंड करें। बता दें कि भारत बंद के दौरान सिटी थाना में एक और सिविल लाइन थाना में तीन केस दर्ज हुए थे। इसमें प्रदर्शन को लीड करने वाले नेताओं को नामजद करके 1100 अज्ञात लोगों पर केस दर्ज हुआ था।

पत्रकारवार्ता करते अंबेडकर संघर्ष समिति के नेता।

‘बेकसूरों को करें रिहा’
समिति के नेता जोगीराम खुंडिया, उदयभान चौपड़ा, एमसी मान सिंह चौहान का कहना है कि पुलिस प्रशासन तुरंत प्रभाव से उनके विरुद्ध दर्ज आपराधिक केस वापस ले। जिन बेकसूर युवाओं काे दुकानों व घरों में घुसकर गिरफ्तार किया है, उन्हें रिहा किया जाए। उन्हें ही पकड़े जिन्होंने तोड़फोड़, पथराव व जानलेवा हमला किया है। अगर प्रशासन तीनों डीएसपी को सस्पेंड नहीं करेगा और उक्त मांगों पर गौर नहीं किया गया तो आंदोलन भी कर सकते हैं।

‘आश्रितों को मिले मुआवजा’
समिति नेताओं ने सरकार से मांग करते हुए कहा कि सफाई कार्य के दौरान मरने वाले कर्मियों के परिजनों को 25 लाख रुपए मुआवजा और परिवार के किसी भी एक सदस्य को नौकरी दें। आरक्षण का प्रतिशत बढ़ाया जाए या फिर अन्य समुदायों के बराबर का दर्जा दें। जिन बच्चों की डीएमसी रोक रखी है, वह जारी करें। इसके बाद ही उन्हें छात्रवृति मिलेगी। सरकार की नीयत साफ नहीं है, जिसके कारण समाज पर अत्याचार बढ़ रहा है।

सरकारी कार्यक्रम का बहिष्कार
समिति ने सरकार द्वारा मनाई जाने वाली अंबेडकर जयंती समारोह का बहिष्कार कर दिया है। किसी भी कार्यक्रम में शामिल नहीं होंगे। अपने स्तर पर कबीर छात्रावास में जयंती मनाएंगे और उक्त मांगों व फैसलों पर चर्चा कर उन्हें पूरा करवाने के लिए आगामी रणनीति बनाई जाएगी।

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