मॉडर्न एरा में नाटक के माध्यम से समझाया रिश्तों का महत्व
आज हम भले ही चांद पर पहुंच गए हो और मंगल ग्रह पर पानी की खोज में लगे हो मगर इन सब बातों के बावजूद मॉडर्न एडरा में भी रिश्तों के महत्व को कम नहीं आंका जा सकता है। क्योंकि समाज की बुनियाद इन्हीं रिश्तों पर टिकी है। कुछ ऐसी ही सीख देता नाटक रहा आषाढ़ का एक दिन।
दरअसल, मंगलवार को अभिनय रंगमंच हिसार एवं सांस्कृतिक मंत्रालय भारत सरकार के सहयोग से रियाज़ स्टूडियो में मंचन किया गया। मोहन राकेश द्वारा लिखित इस नाटक को आधुनिक रंगमंच का पहला हिंदी नाटक भी कहा जाता है। इस नाटक के लिए मंच को खासतौर पर दो भागों में बांटा गया। इसे मनीष जोशी ने निर्देशित किया। मंच को 2 भागों में बांटा गया जहां एक ओर कालिदास और मल्लिका के प्रसंग को दिखाया गया, वहीं दूसरी तरफ आधुनिक माध्यम से दिखाया गया कि किस तरह शहर की चकाचौंध में ग्रामीण युवक खो जाते हैं।
मोहन राकेश के लिखे नाटक आषाढ़ का एक दिन का शहर के रियाज स्टूडियो में हुआ मंचन
नाटक का मंचन करते कलाकार।
तीन अंकों में था नाटक
आषाढ़ का एक दिन तीन अंकों का नाटक रहा। अंक के अनुसार बदलते जीवन के परिदृश्य को दिखाया गया। नाटक के हर अंक के अंत में “कालिदास मल्लिका को अकेला छोड़ जाता है। पहले जब वह अकेला उज्जयिनी चला जाता है। दूसरा जब वह गांव आकर भी मल्लिका से जानबूझ कर नहीं मिलता और तीसरा जब वह मल्लिका के घर से अचानक मुड़ के निकल जाता है।”यह नाटक दर्शाता है कि कालिदास के महानता पाने के प्रयास की मल्लिका और कालिदास को कितनी बड़ी कीमत चुकानी पड़ती है। जब कालिदास मल्लिका को छोड़कर उज्जयिनी में बस जाता है तो उसकी ख्याति और उसका रुतबा तो बढ़ता है लेकिन उसकी सृजनशक्ति चली जाती है।
इनके अभिनय ने किया प्रभावित
कालिदास की भूमिका में दक्ष मल्होत्रा एवं संजीव शर्मा ने प्रभावित किया, वहीं मल्लिका की भूमिका में अदिति शर्मा और निशा ने अपने अभिनय की छाप छोड़ी। विलोम के रूप में कबीर दहिया और गौरव खैरवाल को दर्शकों ने पसंद किया। अनुस्वार अनुनासिक के रूप में विशाल और तेजेंदर ने अपने पात्र के साथ न्याय किया।