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हाउस अलॉटमेंट प्रकरण: लुवास के वैज्ञानिकों का विरोध देखकर एचएयू प्रशासन बैकफुट पर, रजिस्ट्रार ने 7 दिन की मोहलत मांगी

3 वर्ष पहले
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एचएयू में वैज्ञानिकों को हाउस अलॉटमेंट के मामले में लुवास्ता के आह्वान पर लुवास के 80 से अधिक वैज्ञानिक मंगलवार को सड़कों पर विरोध प्रदर्शन करते नजर आए। उन्होंने एचएयू के कुलपति कार्यालय का घेराव कर धरना देने की रणनीति बनाई थी।

उनके विरोध प्रदर्शन की जानकारी एचएयू प्रशासन के पास पहुंच गई। लुवास के वैज्ञानिकों के दबाव में एचएयू के प्रशासन बैकफुट पर खड़ा दिखाई दिया। आनन फानन में एचएयू के रजिस्ट्रार ने लुवास्ता के पदाधिकारियों को हाउस अलॉटमेंट मामले में किसी निर्णय पर पहुंचने के लिए 7 दिन का समय मांगा है। तब तक के लिए उन्होंने धरना स्थगित करने की अपील की तो लुवास्ता ने भी राहत दी। दरअसल, सुबह 9 बजे लुवास के प्राध्यापक वेटरनरी कॉलेज के सभागार के सामने भारी संख्या में एकत्रित हुए तथा एचएयू के मकान अलाटमेंट पर विरोध प्रकट किया।

एचएयू के कुलपति कार्यालय का घेराव कर धरने की रणनीति बनाई थी

एचएयू प्रशासन के पक्ष में उतरी हौटा

लुवास्ता के विरोध को देखते हुए एचएयू के शिक्षक संगठन हौटा ने भी आवाज बुलंद कर ली है। जैसे को तैसा नीति अपनाने हुए हौटा के प्रधान डॉ. करमल सिंह व अन्य पदाधिकारी लुवास के वीसी डॉ. गुरदयाल सिंह को ज्ञापन देने पहुंचे, वीसी के न मिलने पर उन्होंने रजिस्ट्रार को ज्ञापन सौंप दिया। उन्होंने लुवास्ता के विरोध पर आपत्ति जताई है। उन्होंने रजिस्ट्रार से कहा कि विवि में लुवास्ता के इस कदम से शैक्षणिक माहौल पर प्रभाव पड़ेगा। लुवास प्रशासन को इस ओर ध्यान देना चाहिए।

लुवास के बाहर एचएयू प्रशासन के विरोध में नारेबाजी करते वैज्ञानिक।

समाधान नहीं हुआ तो फिर देंगे धरना

एचएयू प्रशासन द्वारा दूसरी बार मीटिंग के लिए निमंत्रण भेजा गया है। इसलिए 7 दिन तक किसी निर्णय का इंतजार किया जाएगा, अगर इसके बाद भी समाधान नहीं निकला तो फिर से धरना दिया जाएगा। इस बार किसी भी आश्वासन की गुंजाइश नहीं रहेगी।\\\'\\\' -डॉ. अशोक मलिक, प्रधान, लुवास्ता।

ये हाउस अलॉटमेंट मामला

एचएयू में वैज्ञानिकों के रहने के लिए आवास बने हुए हैं, जिसमें से सीनियरटी के हिसाब से लुवास के वैज्ञानिकों भी हाउस अलॉट होते हैं। मगर इस बार एचएयू ने अचानक अपनी पॉलिसी में परिवर्तन कर दिया। उन्होंने एचएयू के स्टाफ की अधिकता बताते हुए पॉलिसी बदल दी। जबकि नियमानुसार पॉलिसी बदलने को लेकर विधानसभा में प्रस्ताव पास कर इसमें बदलाव किया जाता। इसको लेकर दोनों ही विवि के कुलपति ने दोनों ही विवि को एक दूसरे का हिस्सा बताकर जल्द ही समाधान निकालने की बात कही थी, मगर इस पर 15 दिन बीतने पर भी कोई समाधान नहीं निकला।

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