जीवन की दो पद्धतियां हैं, एक दशरथ जैसी, दूसरी दशानन जैसी : संत अरविंद
सांसों का क्या भरोसा रुक जाए, कब कहां, पर तू जप ले नाम हरि का यहां पर अर्थात प्रभु ने हमें जो सांसें दी हैं, उसका कोई भरोसा नहीं है वो कहां पर रुक जाए, इसलिए इसका उपयोग हरिनाम में लगाते जाए जो काम आएगा। ये प्रवचन परम संत मुरारी बापू के कृपापात्र संत अरविंद महाराज (प्रयाग वाले) ने पटेल नगर मार्केट स्थित शिव पार्क में शिवा शक्ति मंदिर, गौ माता उपचार केंद्र सनातन धर्म सेवा समिति व पटेल नगर मार्केट द्वारा आयोजित 9 दिवसीय रामकथा में उपस्थित श्रद्धालुओं के बीच व्यक्त किए। कथा से पूर्व डिप्टी मेयर भीम महाजन, निगम पार्षद डॉ. महेंद्र जुनेजा, चंद्रभान गांधी, बीबी तनेजा ने दीप प्रज्ज्वलित किया।
अरविंद महाराज ने राम जन्म प्रसंग की व्याख्या कि जीवन जीने की दो पद्धतियां हैं, एक दशरथ जैसे, दूसरा दशानन यानि रावण जैसे। अगर जीवन महाराज दशरथ जैसे होगा तो घर में राम आएंगे और कृपा बरसेगी और यदि जीवन दशानन जैसा होगा तो जीवन में दु:ख और कष्ट ही आएंगे। वैसे तो दशानन ने भगवान शिव को अपना गुरु बनाया था, मगर उसने गुरु का मार्गदर्शन नहीं लिया और जिसके परिणामस्वरूप उसके साथ-साथ कुल का भी विनाश हुआ।