हिसार। प्रयास ‘एक कौशिश’ ने संस्था ने दाना-पानी योजना का दूसरा चरण योग स्कूल में किया। इस दौरान छात्रों को पक्षियों के लिए चिडिय़ा टापू बनाने का प्रशिक्षण दिया गया। संस्था के निदेशक अनुरंजन कपूर ने बताया कि जब पर्यावरण सरंक्षण व टिकाऊ विकास की बात आती है तो पश्चिम के फार्मूले की नकल में लग जाते हैं। हम यह नहीं समझ पा रहे कि पर्यावरण संरक्षण उनकी संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है। आज बढ़ता प्रदूषण, पेड़ों की कम होती संख्या आदि समस्याएं मानव निर्मित हैं। अत: अपनी संस्कृति के पूर्व नियमों को अब हमें अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाना होगा, नहीं तो स्थिति अत्यंत भयावह हो जाएगी। लुप्त होती चिडिय़ा गौरैया को बचाने की मुहिम इसी पारिस्थितिकी तंत्र को बचाने का हिस्सा मात्र है। इस मौके पर स्कूल के प्राचार्य स्टाफ व संस्था के पदाधिकारी उपस्थित रहे।
पक्षियों के लिए चिड़िया टापू बनाने का छात्रों ने लिया प्रशिक्षण। इस मौके पर प्रयास संस्था के पदाधिकारी उपस्थित रहे।