हिसार | पश्चिम की भौतिकवादी संस्कृति से भारतीयता की रक्षा के लिए श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण अमृतपान समान है। श्रीमद्भागवत सिर्फ ग्रंथ ही नहीं, जीवन जीने का पथप्रदर्शक भी है। ये प्रवचन कैमरी रोड स्थित उमेद विहार कॉलोनी में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन प्रवचन करते हुए विजेंद्र महाराज ने किए। महाराज ने बताया कि हिरणयाकश्यप तब मारा गया जब दिन और रात आपस में मिल रहे थे। हिरण्यकश्यप जैसी बुराई का विनाश हुआ किंतु अपने नाखूनों से हिरण्यकश्यप का वध करने के बाद भी नरसिंह भगवान का क्रोध शांत नहीं हो रहा था लाल आंखें और क्रोध लबालब चेहरे के साथ वह इधर-उधर घूमने लगे उन्हें देखकर हर कोई भयभीत हो गया था, लेकिन प्रहलाद के भक्ति भाव के आगे नरसिंह भगवान शांत हो गए। महाराज ने बताया कि श्रीमद्भागवत कल्पवृक्ष की ही तरह है। यह हमें सत्य से परिचित कराता है भागवत में केवल सत्य की स्तुति की गई है। कथा में आज छवि प्रकाश शर्मा व भजनलाल भाटी मुख्य यजमान थे। उन्होंने भागवत और गोपाल जी का पूजन किया। भागवत कथा में आचार्य अनिल शास्त्री ने बताया कि चौथे दिन रविवार को गजेंद्र मोक्ष रामजन्म राम चरित्र और कृष्ण जन्म का वर्णन किया जाएगा।
उमेद विहार कॉलोनी में चल रही कथा में महाराज ने किए प्रवचन
श्रीमद्भागवत कथा सुनते श्रद्धालुगण।