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‘ड्राइवर और पैसेंजर के विश्वास की जघन्य हत्या है ऑटोरिक्शा में गैंगरेप’

3 वर्ष पहले
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हिसार | ड्राइवर और पैसेंजर के बीच एक विश्वास का रिश्ता होता है। पैसेंजर को ड्राइवर से उम्मीद होती है कि वह उसे मंजिल पर छोड़ेगा। ड्राइवर भी पैसेंजर की देखभाल व उसकी सुरक्षा के प्रति बाध्य होता है। पर, ऑटो रिक्शा में गैंगरेप की वारदात ने ड्राइवर व पैसेंजर के विश्वास की जघन्य हत्या की है। इससे दोनों के रिश्ते में अविश्वास पैदा हुआ है। ड्राइवर ने अपनी ड्यूटी व जिम्मेदारियों का उल्लंघन किया है। ऐसा घिनौना एवं अमानवीय कृत्य करने वालों को सजा देते वक्त मानवीय दृष्टिकोण नहीं रखा जा सकता है। अपराध और सजा एक ही सिक्के दो पहलू हैं। न्याय व्यवस्था के लिए जितना बड़ा अपराध उतनी बड़ी सजा देनी चाहिए। इनके प्रति रहमदिली का सवाल ही नहीं उठता। सरकार भी अपनी जिम्मेदारी समझते हुए महिलाओं की सुरक्षा और अस्मिता की हिफाजत सुनिश्चित करे। -जैसा कि एडीजे डॉ. पंकज की अदालत ने ऑटो रिक्शा गैंगरेप मामले के जजमेंट में लिखा है।

ये सुनाया था फैसला : करीब आठ माह पहले ऑटोरिक्शा में विवाहिता काे अगवा कर गैंगरेप करने वाले तीन दोषियों को सोमवार को अदालत ने अंतिम सांस तक जेल में रहने की सजा सुनाई। कोर्ट ने प्रत्येक दोषी राजीव नगर झिड़ी वासी निखिल, सैनियान मोहल्ला वासी सचिन और और भाटोल जाटान हाल 12 क्वार्टर वासी ऋषि उर्फ मुच्छल (चालक) पर 5 लाख 6 हजार रुपए जुर्माना भी लगाया।

दोषियों को सजा दिलाने में अहम किरदार

पीड़िता : सेंट्रल जेल व अदालत में सुनवाई के दौरान शिनाख्त परेड में पीड़िता ने आरोपियों को छूकर उन्हें पहचाना था। परिवार का सहयोग नहीं मिला तो खुद ही न्याय पाने को लड़ाई लड़ी।

बचाव पक्ष की तरफ से नहीं था गवाह

ऑटो रिक्शा गैंगरेप मामले में बचाव पक्ष की तरफ से एक भी गवाह अदालत में पेश नहीं हुआ। आरोपियों से उनका पक्ष भी कोर्ट में पूछा गया था लेकिन चुप खड़े रहे। यह भी एक प्लस प्वाइंट रहा, जिससे पीड़िता को न्याय और दोषियों को सजा मिली।

पुलिस : डीएसपी जितेंद्र और आईओ मेवा रानी ने हर वह साक्ष्य जुटाए जिस पर फोरेंसिक लैब की मुहर लगी और कोर्ट ने सच मानकर दोषियों को सजा दी।

सवा सौ पेज का चालान, 27 गवाहियां हुईं

अदालत में अभियोग की सुनवाई के दौरान पुलिस की तरफ से सवा सौ पन्नों का चालान पेश किया गया था। इसमें 31 गवाहों की गवाही होनी थी, लेकिन 27 गवाहियां ही अपराध को साबित करने के लिए काफी थी। आरोपी के मकान मालिक से लेकर आॅटो रिक्शा के मालिक तक की गवाही हुई थी।

पीड़ित पक्ष के एडवोकेट ने कई केसों का उदाहरण दिया

मद्रास हाईकोर्ट का एक केस था। उसमें जिक्र था कि देश को अाजाद 69 (अब 70) दशक हो चुके हैं। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने कहा था जिस दिन लड़की आधी रात को सड़क पर अकेली घूमेगी, उसे अपनी इज्जत की हिफाजत महसूस होगी उस दिन देश आजाद होगा। पर, वर्तमान में दिन में भी महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं।

पीड़ित पक्ष के सीनियर एडवोकेट लाल बहादुर खोवाल ने इन तीन केसों का उदाहरण दिया था, जिसमें से कुछ कंटेंट का जिक्र जज ने जजमेंट में भी किया।

-ऑटोरिक्शा में गैंगरेप के मामले में सजा सुनाते समय एडीजे डॉ. पंकज ने जजमेंट में लिखा

एक केस में था दुष्कर्म एक घृणित अपराध है। मानवाधिकार और जीने के अधिकार का हनन है। संविधान ने इज्जत से जीने का अधिकार दिया है। दुष्कर्म जैसा अपराध मौलिक अधिकारों का भी हनन है।

सुप्रीम कोर्ट के एक केस में था कि दुष्कर्म जैसे अपराध में सख्त सजा का प्रावधान जरूरी है। ऐसा नहीं होने पर कानून को मजाक समझा जाएगा। जनता में न्यायालय के प्रति विश्वास बनाए रखने के लिए घिनौने अपराध करने पर सख्त सजा जरूरी है।

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