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बचपन की स्मार्टनेस छीनते गैजेट्स

3 वर्ष पहले
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लगातार स्मार्ट फोन में कार्टून देखने और वीडियो गेम खेलने के कारण बच्चों की गर्दन झुकने लगी है। इससे उनकी स्पाइन यानी रीढ़ में दर्द होने लगा है। वहीं आंखों की रोशनी कमजोर होने के साथ कुपोषण की वजह से मानसिक व शारीरिक विकास भी रुक रहा है। इन रोगों से पीड़ित औसतन हर माह 300 बच्चे एवं किशोर इलाज के लिए सिविल अस्पताल की ऑर्थो ओपीडी में पहुंच रहे हैं। इनकी काउंसलिंग में चौकाने वाला खुलासा हुआ है कि माता-पिता अपने कामों में व्यस्त रहने और डिस्टर्ब होने से बचने के लिए बच्चों को स्मार्ट फोन थमाकर उनकी स्मार्टनेस छीन रहे हैं। 8 से 16 वर्ष के बच्चों एवं किशोरों का घंटों फोन पर व्यस्त रहने के कारण उक्त रोगों से जूझना पड़ रहा है। इनकी कद-काठी की ग्रोथ भी रुक रही है। ऐसे में बच्चों को उक्त बीमारियों से बचाने के लिए पेरेंट्स को उनके लिए समय निकालकर स्मार्ट फोन से आजादी दिलवाने की जरूरत है।

पेरेंट्स ध्यान दें

ऑर्थो ओपीडी में 8 से 16 साल के बच्चों की जांच में चौंकाने वाला खुलासा, मोबाइल फोन, टीवी व लैपटॉप का इस्तेमाल बना रहा बीमार

स्मार्ट फोन यूज करने वाले 300 बच्चे नैकपेन, आंखों में कमजोरी के कारण हर महीने पहुंच रहे सिविल अस्पताल

कुपोषण की वजह से बच्चों का मानसिक और शारीरिक विकास भी रुक रहा

बच्चों की काउंसिलिंग में हुआ खुलासा

गैजेट्स का ज्यादा प्रयोग : रोज करीब 10 से 12 किशोर इलाज के लिए अस्पताल पहुंच रहे हैं। इनकी काउंसिलिंग के दौरान पता चला कि रोज 4 से 5 घंटे फोन पर कार्टून-वीडियो देखने व गेम खेलने में बिताते हैं। गैजेट्स में मोबाइल के अलावा लैपटॉप व टीवी भी शामिल हैं। कई बार 2 से 3 घंटे तक लगातार मोबाइल व लैपटॉप का प्रयोग करते हैं। लेटकर टीवी देखने से भी स्पाइन पेन होता है। गर्दन भी सीधी की बजाय झुक जाती है।

नजरें हो रहीं कमजोर : गैजेट्स इस्तेमाल से बच्चों की आंखों की रोशनी भी कमजोर हो रही है। काफी नजदीक से मोबाइल व टीवी देखने से दूर की नजर कमजोर हो रही है। ऑर्थो ओपीडी में आने वाले 10 से 15 केसों में 5 केस आंखों की रोशनी कमजोर होने संबंधित होते हैं।

न्यूट्रिशन की कमी से रुकी ग्रोथ : स्पाइन प्रोब्लम के अलावा बच्चों में न्यूट्रिशन के कमी होने लगी है। बच्चे गैजेट्स में ज्यादा समय बिताते हैं, जिसके कारण कैल्शियम, विटामिन और प्रोटीन युक्त आहार से दूरी बनाकर जंक फूड यानी मैगी, फिंगर चिप्स, कुरकुरे, पिज्जा व बर्गर खाते हैं। उक्त पोषक तत्व न मिलने के कारण उम्र के हिसाब से शारीरिक व मानसिक ग्रोथ रुक गई है। हाइट और शरीर के अन्य अंग सामान्य बच्चों की तुलना कम ग्रोथ कर पा रहे हैं।

एक्सपर्ट : आउटडोर गेम खेलने को प्रेरित करें

पेरेंट्स बच्चों के साथ ज्यादा समय बिताते हुए उन्हें मोबाइल व टीवी का कम प्रयोग करने दें।

बच्चों को इनडोर की बजाए आउटडोर गेम्स खेलने के लिए प्रेरित करें। इससे मानसिक व शारीरिक ग्रोथ होगी।

बच्चाें को जंक फूड न खाने दें। सलाद व अन्य पौष्टिक आहार का सेवन करने दें।

बच्चों की जिद पूरी करने की बजाय उन्हें गैजेट्स के ज्यादा प्रयोग के दुष्प्रभावों के बारे में बताएं।

ओपीडी में हर माह करीब 300 बच्चे एवं किशोर स्पाइन प्रॉब्लम का इलाज करवाने आते हैं। गैजेट्स के ज्यादा इस्तेमाल से स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है। बच्चे पोषक तत्व खाने की बजाय जंक फूड ज्यादा खा रहे हैं, जिससे मानसिक व शारीरिक विकास भी रुक गया है।’’ डॉ. सुरेश कौशिक, हड्डी रोग विशेषज्ञ, हिसार।

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