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मानव जीवन को सफल बनाने के लिए गुरुकुल शिक्षा पद्धति सर्वोत्तम : सुमेधानन्द

3 वर्ष पहले
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मानव जीवन को सफल बनाने के लिए गुरुकुल शिक्षा पद्धति को सर्वोत्तम बताया गया है। ये उदगार गुरुकुल आर्यनगर के प्रधान एवं सीकर के सांसद स्वामी सुमेधानन्द सरस्वती ने व्यक्त किए। वह रविवार को गुरुकुल के संस्थापक स्वामी देवानन्द सरस्वती की पुण्यतिथि बोल रहे थे। इस अवसर पर गुरुकुल के कार्यकारी प्रधान पं. रामजीलाल और आचार्य देवदत आर्य मुख्य रूप से उपस्थित थे।

गुरुकुल आर्य नगर के मंत्री लाल बहादुर खोवाल एडवोकेट ने बताया कि स्वामी सुमेधानन्द ने देवानन्द महाराज के जीवन पर प्रकाश डाला और मानव जीवन को सफल बनाने के लिए गुरुकुल शिक्षा पद्धति को सर्वोत्तम बताया। स्वामी जी ने एक-एक पैसा इकठ्ठा करके और अनाज जुटाकर इस इमारत का निर्माण किया। आचार्य रामस्वरूप शास्त्री तथा मान सिंह पाठक अपने अथक प्रयास से इसे आगे बढ़ा रहे हैं। आचार्य रामस्वरूप शास्त्री गुरुकुल की स्थापना समय से ही इस गुरुकुल में एक रस छात्रों को अध्ययन करवा रहें हैं। आचार्य रामस्वरूप शास्त्री ने बताया कि स्वामी जी त्याग तपस्या एवं बलिदान की प्रतिमूर्ति थे। गुरुकुल की कार्यकारिणी के सदस्य, आर्यसमाज के सच्चे सिपाही वैदिक धर्म प्रचारक एवं समाज सेवी महात्मा अतर सिंह जी स्नेही को भी भावभीनी श्रद्धांजलि समर्पित की गई। इस मौके पर कर्नल ओमप्रकाश, सत्यप्रकाश मित्तल, चन्द्रदेव शास्त्री, ईश्वर सिंह घिराय, डॉ सत्यवीर मलिक, शशिकान्त, प्राचार्य जोगेन्द्र सिंह, रामकुमार आर्य, रमेश कुमार, राजकुमार शास्त्री, राधाकृष्ण, बलवान शास्त्री विनोद कुमार, सुनील कुमार, कश्मीर चन्द, मैनेजर रामफल वर्मा, ओमवीर, निहाल सिंह डांगी, युद्धवीर आर्य, गुलशन आदमपुर, रामकुमार जाखड़, दीप कुमार, महेन्द्र आर्य, हरि सिंह उब्बा, दयानन्द आर्य , गणेशचन्द्र शास्त्री, दयानन्द बेरवाल,पवन तुन्दवाल एडवोकेट, रामफल वर्मा, भगवान दास वर्मा अजय शास्त्री तथा कृष्ण कुमार आर्य उपस्थित रहे।

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