वर्तमान परिवेश में भागदौड़ भरी जिंदगी इंसान को स्वास्थ्य के प्रति लापरवाह बनाती जा रही है। संतुलित एवं पौष्टिक आहार न लेने के कारण अधिकतर लोग मोटापे का शिकार होते जा रहे हैं। इसकी जागरूकता के लिए आधार अस्पताल में तीसरा समूह परामर्श शिविर लगाया गया।
इसमें आधार मेटाबॉलिक सर्जरी सेंटर के एमएस, एम सी एच (गेस्ट्रो सर्जन), एडवांस लेप्रोस्कोपिक व बेरियाट्रिक सर्जन डॉ. प्रभु एस स्वामी तथा एमएस एडवांस लेप्रोस्कोपिक सर्जन डॉ. हरीश शर्मा ने लोगों को मोटापे, उसके कारण व इलाज संबंधी निशुल्क परामर्श दिया। डॉ. स्वामी ने बताया कि मोटापा एक ऐसी बीमारी है, जो अपने साथ कई बीमारियों को लाता है। डायबिटीज, उच्च रक्तचाप, शुगर, हार्ट अटैक, स्ट्रोक, स्लीप एप्निया और दमा जैसी कई बीमारियां मोटापा के कारण तेजी से बढ़ती हैं। मोटापा का आंकलन बीएमआई (बॉडी मास इंडेक्स) से किया जाता है, जिसका बीएमआई 32.5 से अधिक होता है वह मोटापे का रोगी होता है। डॉ. हरीश शर्मा ने बताया कि वजन को गैर-सर्जिकल पद्धति जैसे डाइट, व्यवहार में बदलाव व नियमित व्यायाम से भी कुछ वजन कम किया जा सकता है। बेरियाट्रिक सर्जरी से पेट (आमाशय) के 80 प्रतिशत हिस्से को अलग कर दिया जाता है। बेरियाट्रिक सर्जरी तीन तरह की होती है। इसमें लैप बैंड, स्लीव गैस्टिक्टॉमी गैस्ट्रिक बाइपास सर्जरी की जाती है। इस सर्जरी के बाद खाने की क्षमता कम हो जाती है। सर्जरी के बाद 12 से 18 महीने में अतिरिक्त बढ़े हुए वजन का 55 से 85 प्रतिशत वजन कम हो जाता है। डॉ. शर्मा ने बताया कि यह सर्जरी दिल, सांस, बेहोशी के स्पेशलिस्ट चिकित्सकों की देख-रेख में ही किया जाता है।
बेरियाट्रिक सर्जरी करा चुके व्यक्ति को पुरस्कृत करते डॉ. हरीश शर्मा।