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नए भारत में नई सड़कें चमचमाती हैं, सफर में अब तो पेड़ों की छांव याद आती है...

3 वर्ष पहले
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हिसार | वृक्षमित्र पर्यावरण बचाओ समिति की ओर से सोमवार को टाउन पार्क में मासिक काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। लोगों को पर्यावरण के प्रति सचेत करने के लिए पिछले आठ साल से लगातार हर माह ऐसी गोष्ठियों का आयोजन किया जाता है। समिति के प्रधान अशोक गुप्ता की अध्यक्षता में आयोजित इस काव्य गोष्ठी में अनेक कवियों ने पर्यावरण पर अपनी रचनाओं का पाठ किया। मंच संचालक जय भगवान लाडवाल ने बिश्नोई समाज को पर्यावरण का सबसे बड़ा रखवाला मानते हुए कहा-‘रूखों का रखवाला बना बिश्नोई समाज, जान गवां दी रूखों की खातिर, सिर पर बंधा शहीदी का ताज’। भीम सिंह हुड्डा ने कहा-‘बहुत शुक्रिया, बड़ी मेहरबानी उनकी जिन्होंने वृक्ष लगाए’। युवा कवि सरफराज खान ने भी इसी क्रम को जारी रखते हुए सुनाया-‘चलो साजन सुधयों के गांव में, नदी किनारे पीपल की छांव में’। कवि जय सिंह रावत भी वृक्षों की छांव में ही सुख पाते हैं। उनकी कविता की बानगी देखिए-‘पाना है सुख तो बैठो वृक्षों के नीचे, भुलाना है गम तो बैठो वृक्षों के नीचे’। युवा कवि संजय सागर ने भी इसी क्रम को जारी रखते हुए सुनाया-‘नए भारत में नई सड़कें चमचमाती हैं, सफर में अब तो पेड़ों की छांव याद आती है’। इस दौरान पीपी शर्मा ने सुनाया-‘वृक्षमित्र को गीत सुनाने आता हूं बार बार, क्यों कि यहां हरियाली लेकर आया कवियों का दरबार।’ कवि ऋषि सक्सेना ने अपने चेतावनी भरे लहजे में कहा-‘न चलाओ खंजर, ना बनों भक्षक, वृक्ष हमारे जीवन के हैं बड़े रक्षक’। विषयांतर करते हुए कवि सुमित ने कहा- तकदीर के खेल में हम कहां से कहां हुए, सिकंदर की कहानियां पढ़-पढ जो जवां हुए।’ एडवोकेट सुरेन्द्र आनंद गाफिल ने सुनाया-‘दर्द देने वाले ही अब दर्द की दवा देंगे’।

वृक्षमित्र पर्यावरण बचाओ समिति की टाउन पार्क में मासिक काव्य गोष्ठी हुई

पर्यावरण बचाओ समिति द्वारा टाउन पार्क पार्क में आयाजित काव्य गोष्ठी के दौरान मौजूद कविगण।

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