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भूमिजनित व बीज जनित बीमारियों से बचाव के लिए बीजोपचार ही उपाय

3 वर्ष पहले
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हिसार | भूमि व बीजों में विद्यमान बीमारियां विभिन्न फसलों को नुकसान पहुंचाती हैं, लेकिन कुछ बीमारियां ऐसी हैं, जिनकी रोकथाम बिजाई से पहले बीज को उपयुक्त जीवनाशी द्वारा उपचारित कर बोने पर ही हो सकती है। बाद में दवाओं के स्प्रे से इनकी सफल रोकथाम नहीं हो पाती। जो बीमारियां भूमि में पनपती हैं, उन खेतों को गर्मियों के महीनों में गहरी जुताई कर खुला छोड़ देने से काफी कम किया जा सकता है। इसके अलावा उचित फसल चक्र अपनाकर भी इन्हें कम किया जा सकता है। अगर ऐसा करना संभव न हो तो बीजोपचार ही एकमात्र विकल्प है, जिससे इन बीमारियों की रोकथाम हो सकती है। यह बात एचएयू से सेवानिवृत्त कीट विज्ञानी डॉ. आरके सैनी ने कही। वे गांव कुलेरी में कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के तत्वावधान में आयोजित ग्वार जागरूकता शिविर में किसानों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि ग्वार फसल का जड़गलन रोग भूमि जनित रोग है, जिसके प्रकोप से बिजाई के 15-20 दिन बाद ही पौधे पीले पड़ने लग जाते हैं तथा सूखने लगते हैं।

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