सिविल अस्पताल में मरीजों को रेफर करने का खेल उजागर हो गया। इसको खेलने वाले चेहरों पर कार्रवाई करने वाली रिपोर्ट लिख दी गई है। शहर में कहीं भी एक्सीडेंट होता है, स्थानीय लोग सरकारी हेल्पलाइन नंबर से कॉल करते हैं और दुर्घटना वाली जगह पर पहुंचती है प्राइवेट एंबुलेंस.... यही नहीं सरकारी एंबुलेंस भी मौके पर पहुंचती है मगर 8 से 15 मिनट लेट। इस खेल काे खेलने वाले इतने शातिर हैं कि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी जांच करें तो आंखों में धूल झोंक देते हैं। इसका खुलासा तब हुआ जब गांव ढाणी रायपुर निवासी राजेश कुमार ने पिता के एक्सीडेंट के बाद सरकारी सिस्टम के खिलाफ शिकायत की। उनकी शिकायत पर जन परिवाद समिति की बैठक में जांच में खुलासा हुआ कि अस्पताल में ऑपरेटर से लेकर प्राइवेट एंबुलेंस चालक तक सभी मिलकर एक रैकेट चला रहे हैं। मामले में ऑपरेटर, एंबुलेंस के मालिक पर कार्रवाई की तैयारी कर ली गई है। वहीं पूर्व में स्वास्थ्य विभाग के जिन अधिकारियों ने हेल्पलाइन कर्मी को जांच में क्लीन चिट दी थी, उन अधिकारियों की मंशा की जांच कराई जाएगी। इस मामले में पीएमओ से लेकर सीएमओ के नेतृत्व में दो बार समिति जांच कर चुकी है। अब डीसी अशोक कुमार मीणा ने बताया कि जांच पूरी हो चुकी है। (संबंधित खबर पेज |5 )
जनपरिवाद समिति की बैठक में एसडीएम की जांच में हुआ खुलासा, डीसी ने कार्रवाई के लिए रिपोर्ट मांगी
सरकारी एंबुलेंस पहुंची मगर प्राइवेट के बाद
इस मामले में सातरोड़ पर एक्सीडेंट होने पर लोगों ने 102 नंबर पर कॉल किया। यहां से सबसे पहले जानकारी प्राइवेट एंबुलेंस के मालिक को और कुछ समय बाद सरकारी एंबुलेंस को दी गई। लोकेशन के करीब प्राइवेट एंबुलेंस का ड्राइवर घायल को एएमसी अस्पताल ले जाता है। सरकारी एंबुलेंस भी मौैके पर जाती है मगर बिना मरीज के वापस चली जाती है।
समझिए : ऑन द स्पॉट से मरीज को निजी अस्पताल ले जाने का खेल
शिकायत पर करते भ्रमित, एक ही नंबर की दो एंबुलेंस
शिकायत पर करते भ्रमित, एक ही नंबर की दो एंबुलेंस
इस मामले में शक हुआ तो मरीज ने शिकायत की। तो प्राइवेट एंबुलेंस का एक चालक आकर अधिकारियों के सामने शपथ पत्र देकर कहता है कि मैं हांसी के आगे अलीपुर से आ रहा था सातरोड़ पर मरीज को देखा तो एएमसी अस्पताल ले गया। उसने बताया कि उसे एएमसी अस्पताल से एक तीमारदार ने फोन किया था और इस एक्सीडेंट की जानकारी दी थी। इसके बाद जांच में एसडीएम एक असली ड्राइवर धर्मवीर को लेकर आते हैं, जो शपथ-पत्र देकर बताता है कि मैं सिविल अस्पताल के बाहर खड़ा था, एंबुलेंस के मालिक सुनील का फोन आया तब सातरोड गया और मरीज को मालिक के कहने पर एएमसी अस्पताल ले गया। अधिकारियों ने जांच की तो पाया कि धर्मवीर सही बोल रहा है। इस चालक की इसी बात पर जांच अधिकारियों को शक हुआ कि हांसी से भी आगे 40 किलोमीटर दूर बैठे व्यक्ति को हिसार का कोई तीमारदार सातरोड़ की घटना बता रहा है। जांच और आगे बड़ी तो मालूम हुआ कि इस रैकेट को अमलीजामा पहनाने के लिए शहर में दो एंबुलेंस एक ही नंबर से संचालित की जा रही हैं।
इस मामले में शक हुआ तो मरीज ने शिकायत की। तो प्राइवेट एंबुलेंस का एक चालक आकर अधिकारियों के सामने शपथ पत्र देकर कहता है कि मैं हांसी के आगे अलीपुर से आ रहा था सातरोड़ पर मरीज को देखा तो एएमसी अस्पताल ले गया। उसने बताया कि उसे एएमसी अस्पताल से एक तीमारदार ने फोन किया था और इस एक्सीडेंट की जानकारी दी थी। इसके बाद जांच में एसडीएम एक असली ड्राइवर धर्मवीर को लेकर आते हैं, जो शपथ-पत्र देकर बताता है कि मैं सिविल अस्पताल के बाहर खड़ा था, एंबुलेंस के मालिक सुनील का फोन आया तब सातरोड गया और मरीज को मालिक के कहने पर एएमसी अस्पताल ले गया। अधिकारियों ने जांच की तो पाया कि धर्मवीर सही बोल रहा है। इस चालक की इसी बात पर जांच अधिकारियों को शक हुआ कि हांसी से भी आगे 40 किलोमीटर दूर बैठे व्यक्ति को हिसार का कोई तीमारदार सातरोड़ की घटना बता रहा है। जांच और आगे बड़ी तो मालूम हुआ कि इस रैकेट को अमलीजामा पहनाने के लिए शहर में दो एंबुलेंस एक ही नंबर से संचालित की जा रही हैं।
दो सुनवाई के बाद एसडीएम और समिति मेंबर ने की मामले की जांच
26 अक्टूबर 2017 को जनपरिवाद समिति में ढाणी रायपुर के राजेश पुत्र गयासा राम ने शिकायत दी कि उनके पिता का 12 मार्च 2017 को सातरोड के पास एक्सीडेंट हुआ। वह सूचना पर घटना स्थल पर पहुंचे तो उन्हें बताया कि सिविल अस्पताल में पिता को भेजा है। वह सिविल गया तो वहां पर पिता नहीं थे। राजेश ने 102 कर्मी रणधीर से पूछा तो उसने कहा किया हमें मौके पर मरीज ही नहीं मिला। बाद में किसी का फोन आने पर रणधीर ने कहा कि एएमसी अस्पताल में आपके पिता भर्ती हैं। शिकायत थी कि ऑपरेटर को कैसे पता चला कि उनके पिता एएमसी में हैं। जनपरिवाद समिति में दो सुनवाई के बाद राज्य मंडी ने जांच एसडीएम हिसार व समिति मेंबर प्रो. मंदीप मलिक के हाथ में सौंपी थी।