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संकट आने पर रोने की बजाए उसे मुस्कुरा कर झेलें : विजेंद्र महाराज

3 वर्ष पहले
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कैमरी रोड स्थित उमेद विहार कॉलोनी में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में विजेंद्र महाराज ने प्रवचन करते हुए कहा कि श्रीमद्भागवत कथा पुराण मानव जीवन जीने की कला सिखाती है। इसलिए जहां भी श्रीमद्भागवत कथा हो रही हो उसे ध्यानपूर्वक सुनना चाहिए।

उन्होंने कहा की हिन्दुओं के शास्त्रों में पवित्र वेद व गीता विशेष हैं, उनके साथ अठारह पुराणों व चार वेद हैं। इनमें श्रीमद्भागवत सुधासागर, रामायण, महाभारत भी विशेष प्रमाणित शास्त्रों में से हैं। उन्होंने श्रीमदभागवत कथा महापुराण के बारे में बताते हुए कहा कि यह एक ऐसी कथा है जिसके सुनने से पापों से मुक्ति मिल जाती है। मुनष्य इस कथा को सुनकर भवसागर से पार हो सकता है। पवित्र वेद व पवित्र श्रीमद्भगवत गीता तथा पवित्र पुराणादि सर्व मानव मात्र के कल्याण के लिए है।उन्होंनेे भागवत कथा के महत्व के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि एक वाक्य भी यदि मानव के जीवन में उतर जाए तो जीवन सफल हो जाता है। यदि आपका अपमान होता है और मन में यदि कुछ चाहा था, वह नहीं हो पाया तो आप मंदिर में जाकर भगवान से शिकायत करते हैं। जीवन में कष्ट तो आते जाते रहते हैं, संकट आने पर रोए नहीं बल्कि मुस्कराते रहिए। हम लोग आमतौर पर सुख में तो जीते हैं, मगर दु:ख आने पर रोते हैं। सत्संग उन्हीं लोगों के लिए होता है जिनमें परमात्मा से मिलने की इच्छा होती है। कथा के दूसरे दिन मुख्य यजमान देशराज वर्मा ने पूजन किया। कथा में संजय यादव, अरुण यादव, गुलाब वर्मा, अरविंद यादव, मुकेश चावला, सीमा यादव, मंजू ठाकुर, मोनिका वर्मा, अनीता यादव व सुमेस्ता वर्मा आदि श्रद्धालु उपस्थित थे।

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