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जैविक खाद का उपयोग कर सालाना बढ़ाई 2 लाख की आय

3 वर्ष पहले
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राघवेंद्र तोमर | गोहद (भिंड)

गोहद क्षेत्र के किसान ज्यादा पैदावार लेने के लिए हर तीन साल में अपने खेतों की मिट्‌टी एकल हल से पलट रहे हैं। इससे जमीन की उर्वरा शक्ति में बढ़ोतरी हो रही है। इसके अलावा किसान जैविक पद्धति से गेहूं, धान और सरसों की खेती कर रहे हैं। साथ ही पशुपालन को किसानों ने आय का अतिरिक्त जरिया बना लिया है।

गौरतलब है कि जिले के किसान फसल उपज के लिए रासायनिक खाद का उपयोग करते हैं। लेकिन गोहद क्षेत्र के किसानों ने पैदावार और मिट्‌टी की उर्वरक क्षमता बढ़ाने के लिए 10 साल पहले कुछ अलग करने की सोची, वर्तमान में किसानों के द्वारा हर तीन साल में एकल हल (रीडगैर हल) के माध्यम से अपने खेतों की मिट्टी को पलटकर उसमें रासायनिक खाद के स्थान पर जैविक खाद का उपयोग कर रहे हैं। स्थिति यह है कि उनके द्वारा किए गए इस प्रयोग से वे हर साल दो से ढाई लाख रुपए सालाना अधिक कमा रहे हैं। गोहद के ग्राम बंधवालापुरा निवासी सरदार कुलवंत सिंह, ग्राम चकटेंटो निवासी सरदार स्वरूप सिंह, ग्राम झावलपुरा निवासी बदलसिंह तोमर, बिरखड़ी निवासी नेपाल सिंह जादौन सहित अन्य क्षेत्र के किसानों के लिए एक मिसाल बन गए हैं।

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रामभरोस मीणा | होशंगाबाद

गेहूं के लिए पहचाने जाने वाले डोलरिया ब्लाक के गांवों में किसानों का रुझान तरबूज फसल की ओर बढ़ रहा है। ढाई महीने की फसल से वे लाखों रुपए कमा रहे हैं। ग्राम डोलरिया के किसानों ने तरबूज फसल लगाई है। ग्राम डाेलरिया के किसान अजय सिंह राजपूत खेत ने 10 जनवरी को खेत में सागर किंग कंपनी का 30 हजार रुपए किलो वाला बीज को लगाया था। यह एक एकड़ में 300 ग्राम ही बीज लगता है। ग्राम डोलरिया के किसान अजय राजपूत ने ढाई एकड़ में पहली बार तरबूज लगाए हैं। ढाई माह में 82 टन तरबूज बेच चुका हूं। 4 लाख से अधिक की फसल बेच चुका हूं। 70 हजार रुपए लागत आई थी। करीब तीन लाख 30 हजार रुपए शुद्ध मुनाफा हुआ है।

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