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कपड़े की गुणवत्ता परखे बिना स्कूलों में बच्चों को बांटी जाएगी 200 करोड़ रुपए की ड्रेस

3 वर्ष पहले
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प्रदेश के 25 जिलों में बगैर कपड़े की गुणवत्ता परखे स्कूली बच्चों को ड्रेस बांटी जाएंगी। यह काम राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन को सौंपा गया है, जो स्वसहायता समूहों (एसएचजी) को दिया गया है। इसके लिए सरकार ने कलेक्टरों के माध्यम से एसएचजी ग्रुप को 200 करोड़ रुपए बांटे जाने के लिए मंगलवार (7 अगस्त) तक का समय तय किया है, ताकि 30 सितंबर के पहले बच्चों को ड्रेस वितरण का काम किया जा सके। इधर, जिलों में कलेक्टरों ने राशि आवंटन करने में असमर्थता जताई है। इसकी वजह एसएचजी समूहों के जीएसटी नंबर नहीं हैं और राज्य सरकार के भंडार क्रय नियमों के हिसाब से कपड़े की खरीदी नहीं हो रही है।

स्वसहायता समूह खुद करेंगे कपड़ों का चयन

नई व्यवस्था में स्वसहायता समूह 7.50 लाख रुपए तक का सीमित टेंडर कर स्वयं कपड़ा निर्धारित कर खरीदी करेंगे। इसमें उन्हें ड्रेस की गुणवत्ता और कीमत तय करने की छूट दी गई है। राज्य सरकार के भंडार क्रय नियमों के हिसाब से कपड़े की खरीदी सिर्फ शासकीय उपक्रमों में मप्र खादी बोर्ड, राज्य हथकरघा बुनकर सहकारी संघ, संत रविदास हस्तशिल्प एवं हथकरघा विकास निगम और मप्र राज्य पाव लूम बुनकर सहकारी संघ से कपड़े की खरीदी भी की जा सकती है। कपड़ा खरीदी को आरक्षित सूची में रखा गया है। यदि कोई संस्था इस नियम से छूट चाहती है तो ग्रामोद्योग विभाग के प्रस्ताव पर कैबिनेट की मंजूरी आवश्यक होगी, जो अभी नहीं ली गई है।

इन जिलों होना है खरीदी : भोपाल, बैतूल, आगर मालवा, बड़वानी, बैतूल, छिंदवाड़ा, दमोह, धार, डिंडोरी, गुना, ग्वालियर, होशंगाबाद, झाबुआ, मंडला, रायसेन, राजगढ़, रीवा, सागर, सीहोर, शहडोल, शाजापुर, श्योपुर, शिवपुरी, सिंगरौली, सीधी और विदिशा जिले के लिए खरीदी होना है।

जो मापदंड हैं, उसी हिसाब से की जाएगी खरीदी

स्कूलों में बच्चों को वितरित की जाने वाली ड्रेस खरीदी का काम राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन एसएचजी के माध्यम से करवा रहा है। इसमें निश्चित रूप से कपड़ा खरीदी के जो मापदंड हैं उसका वह पालन करवाएगा। दीप्ति गौड़ मुखर्जी, प्रमुख सचिव, स्कूल शिक्षा विभाग

आजीविका मिशन मान रहा है केंद्र के नियम

राष्ट्रीय आजीविका मिशन के तहत राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन नियमों की व्याख्या केंद्र के हिसाब से कर रहा है। इनमें टेंडर प्रक्रिया होगी, कैसे कपड़े की खरीदी की जांच होगी, इसका जिक्र नहीं है। वहीं, राज्य सरकार का गुणवत्ता परखने के लिए पावरलूम सेवा केंद्र बुरहानपुर में है। इसकी रिपोर्ट के बाद ही कपड़े की खरीदी की जा सकती है।

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