भास्कर संवाददाता| होशंगाबाद
शहर को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने वाले स्वर्गीय अनिल माधव दवे को एक साल में ही भुला दिया गया। अनिल माधव दवे की पहली पुण्यतिथि पर बांद्राभान में भंडारा कार्यक्रम कराया पर शहर में कोई बड़ा कार्यक्रम नहीं हुआ। प्रशासन ने भी दवे की इच्छा अनुसार पौधरोपण सहित अन्य काम भी स्मृति में नहीं कराए। इक्का दुक्का जनप्रतिनिधियों ने ही उन्हें श्रद्धांजलि दी। अनिल माधव दवे लगातार 10 साल तक जिले को अपनी कर्मस्थली बनाकर काम किया। गैस आधारित शवदाह गृह, अस्मिता गृह और देव स्थान के लिए आदिवासी क्षेत्रों में अपनी सांसद निधि दी। नदी महोत्सव के माध्यम से विश्व के पटल पर बांद्राभान का नाम पहुंचाया। पर 18 मई 2017 में अंतिम संस्कार के समय राजनेताओं ने स्मृति को पौधरोपण कर जीवंत रखने की बात कही थी। पिछले एक साल में ऐसा कुछ नहीं किया। उनके निवास शिवनेरी पर भी कोई नहीं पहुंचा। वह सूना पड़ा रहा। दो मजदूर वहां काम करते मिले। पौधों की देखरेख का काम भी वहीं करते है।
आदर्श पंचायत जहानपुर ने बांद्राभान में कराया भंडारा
अनिल माधव दवे के आदर्श ग्राम पंचायत जहानपुर ने बांद्राभान में भंडारा किया। सरपंच हरिसिंह मीणा ने बताया दवे की इच्छा के अनुसार श्रमदान और नर्मदा संरक्षण का काम किया। इसमें अंगद सिंह, पवन सिंह, रवि केवट सहित गांव के लोग मौजूद रहे।