भास्कर संवाददाता | होशंगाबाद
बीना से इटारसी तक बन रही तीसरी रेलवे लाइन में नर्मदा पुल पर बाढ़ से मिट्टी का कटाव राेकने हाइड्रो सीडिंग तकनीक से घास लगाई जा रही है। नर्मदा ब्रिज पर 20 फीट ऊंची वाॅल को बारिश में बहने और बाढ़ से बचाने के लिए रेलवे हाइड्रोसीड घास लगवा रहा है। एजेंसी से जुड़े आवास गुप्ता ने बताया जिले में पहली बार रेलवे ट्रैक के तटों पर हाइड्रोसीड घास लगाई जा रही है। घास के 6 इंच की होने तक संरक्षण किया जाएगा।
रेलवे लाइन पर जिले में पहली बार आधुनिक तकनीक से बाढ़ से मिट्टी का कटाव रोकने का हो रहा प्रयास
यह फायदा: हाइड्रोसीडिंग से लगी घास की जड़ के गुच्छे बन जाते हैं, जो मिट्टी को पकड़े रखती है। जिस स्थान पर पानी होता है, वहां 12 महीने हरियाली होती है। मेंटेनेंस पर ज्यादा खर्च नहीं होता।
यह है हाइड्रो सीडिंग सिस्टम
हाइड्रो सीडिंग सिस्टम में मिट्टी के ढलान पर लंबी जड़ें और गुच्छे दार घास लगाई जाती है। इससे मिट्टी खिसकती नहीं है। केमिकल के साथ स्थानीय प्रजाति के पौधों के बीज, खाद, फर्टीलाइजर और घास मिलाकर एक मशीन में डालते हैं। इस मिश्रण को स्प्रे से कमजोर मिट्टी पर उड़ेला जाता है। एक सप्ताह में पौधे और घास उगनी शुरू हो जाती है। एक माह में ढलान या मिट्टी पर हरियाली आ जाती है। इसके बाद मिट्टी से भूस्खलन थम जाता है। बारिश का पानी भूमिगत होने के बजाय सीधे नीचे की ओर बहता है। घास को प्रेशर पाइप और मिक्चर मशीन से लगाते हैं। पहले घास के बीजों को खाद और केमिकल के साथ मिक्स कर पाल पर छिड़काव कराया जा रहा है ताकि हवा, पानी में बीज नहीं बहे।