अमृत से बढ़कर होता है भगवान का नाम: पं. तिवारी
होशंगाबाद| ब्राह्मण भवन राजा मोहल्ला में भागवत कथा का समापन शुक्रवार को हुआ। पं. राजेश तिवारी ने दत्तात्रेय भगवान के 24 गुरुओं की व्याख्या करते हुए बताया शिक्षा गुरु अनेक होते हैं पर दीक्षा गुरु एक ही होता है। कथावाचक ने कहा शास्त्र का ज्ञान नहीं है तो शिष्य को संशय का हरण नहीं करा सकते। हर वस्तु की प्राप्ति के साथ उस में वियोग भी होता है। हर पल भगवान की भक्ति करना मनुष्य का मूल उद्देश्य होना चाहिए। सांसारिक कार्य करने के बाद पश्चाताप हो सकता है, पर ईश्वरीय भक्ति साधना ध्यान व परोपकार के बाद पश्चाताप नहीं, बल्कि आनंद व आत्मशांति की अनुभूति होती है। कथा वाचक ने अंतिम दिन राजा परीक्षित की कथा सुनाई। विभिन्न प्रसंगों का वर्णन किया। आयोजन को सफल बनाने के लिए अंकित तिवारी, सुधीर दुबे का योगदान रहा।