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कोर्स पढ़ाने के लिए शिक्षकों को दी जा रही विशेष ट्रेनिंग

3 वर्ष पहले
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भास्कर संवाददाता |होशंगाबाद

सरकारी स्कूलों के शिक्षक, अध्यापक अब पुराने तरीकों से बच्चों को नहीं पढ़ा पाएगी। नए सत्र से बच्चों के साथ शिक्षकों को भी पढ़ाई के पुराने पैटर्न में बदलाव कर प्रोजेक्ट वर्क पर फोकस करना होगा। स्कूल शिक्षा विभाग को पढ़ाई की नई तकनीक सिखाने के एसपीएम हायर सेकेंडरी स्कूल में ट्रेनिंग दी जा रही है। इस के लिए संभाग के 10 वीं कक्षा में गणित व विज्ञान पढ़ाने वाले शिक्षकों को विशेष ट्रेनिंग दी जा रही है। एक समान शिक्षा नीति लागू करने की कवायद के लिए शिक्षा विभाग नए सत्र से 2018-19 में गणित व विज्ञान विषय के कोर्स में स्टेट वॉर्ड के कुछ टॉपिक को जोड़ा गया है। जिस की ट्रेनिंग शिक्षकों को दी जा रही है जिस से वे बच्चों को उस टॉपिक के विषय में अच्छे से जानकारी दे सकें। यह ट्रेनिंग लगभग 29 जून तक चलेगी।

ऐसा होगा कोर्स: पिछले साल 9वीं व 11वीं के कोर्स में बदलाव किया गया था इस साल 10वीं कुछ कोर्सों में बदलाव किया गया है जिस की ट्रेनिंग मास्टर ट्रेनर द्वारा दी जा रही है। यह ट्रेकिंग 5 दिन की होती है जिस में 10 मास्टर ट्रेनर के द्वारा सुबह 9 से 5 बजे तक दी जाती है जिस में 6 बैच चलेंगे। एक बैच बैतूल, हरदा, होशंगाबाद जिले के 82 शिक्षक ट्रेनिंग लेते है। कोर्स डायरेक्टर वीके चौहान ने बताया कि एनसीआरटी, सीबीएसई कैटेगरी में आ गया है। जिस में 10वीं के गणित विषय में कुछ टॉपिक को बदला गया है।

प्रतियोगिता परीक्षा में मिलेगी मदद

एनसीईआरटी की किताबों को विभिन्न प्रतियोगिता परीक्षा के लिए सर्वोत्तम माना जाता है चाहे वह सिविल सेवा की परीक्षा हो या फिर पीईटी, पीएमटी, जेईईई सहित अधिकांश परीक्षाओं से जुड़े सवाल एनसीईआरटी की बुक्स से पूछे जाते हैं। बदले गए कोर्स की पुस्तकें गर्वमेंट ने उपलब्ध करा दी है जिस का मॉड्यूल रीजनल कॉलेज भोपाल में तैयार किया जा रहा है जिसे सरकार नि:शुल्क उपलब्ध कराएगी।

गणित विषय के टॉपिक

टिक्नोमेट्रिक में पिछले साल 9वीं में पढ़ाया जाता था पर इस साल से 10वीं में पढ़ाया जाएगा। क्षैत्रमिति पहले सरल प्राशन पूछे जाते थे अब कठिन प्राशन पूछे जाएंगे। वर्ग समीकरण में पूर्ण वर्ग विधि को जोड़ दिया गया। अनुपात व समानुपात के अध्याय को हटा दिया गया। गणित में पढ़ी जाने वाली रचनाएं अलग रूप में आ गई हैं। वीके चौहान ने बताया कि सबसे पढ़ा परिवर्तन यह हुआ कि पहले ज्यादा प्राशन हुआ करते थे अब प्रशनों की संख्या कम हो गई है।

पढ़ाई में नहीं रहेगा अंतर

एनसीईआरटी की पाठ्यक्रम लागू होने से सीवीएसई और एमपी वॉर्ड की पढ़ाई में कोई अंतर नहीं रहा। प्रतियोगी परीक्षाओं में एनसीईआरटी के पाठ्यक्रम से प्राशन पूछे जाते है जिन्हें हल करने में बच्चों को सुविधा होगी। अब बच्चों को दिक्कत नहीं होगी। इस से बच्चों को फायदा होगा इससे ऑल इंडिया लेवल कॉम्पटीशन में मदद मिलेगी। राजेश गुप्ता प्रभारी डीईओ

विज्ञान विषय के टॉपिक

विज्ञान विषय के मास्टर ट्रेनर राजीव द्विवेदी ने बताया कि पहले विज्ञान विषय में 22 अध्याय हुआ करते थे जिन्हें कम करके 16 कर दिए गए। जो इस प्रकार हैं। पुराने कोर्स में फिजिक्स के 8, केमेस्ट्री के 4, बायो के 8 व पर्यावरण के 2 अध्याय हुआ करते थे। पर अब नए कोर्स में केमेस्ट्री के 5, फिजिक्स के 5, बायो के 4 व पर्यावरण के 2 अध्याय कर दिए गए। इस में अम्ल छारक और लवण व तत्वों का आवर्त वर्गीकरण के दो नए चैप्टर को जोड़ा गया है। उन्होंने बताया कि विज्ञान विषय में 9 ट्रेनर व कोर्स ट्रेनर एसएल गौर के द्वार ट्रेनिंग दी जा रही हैं।

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