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संजीवनी शरणम में बुजुर्गों को मिली खुशियां, बिता रहे खुशनुमा पल

3 वर्ष पहले
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भास्कर संवाददाता | होशियारपुर

‘हाय नीं मेरा बालम है बड़ा जालम, ओ मैंनू कदी कदी करदा है प्यार... कदी मार दा ए शमका की दी मार...’ और ‘बत्ती बाल के बनेरे उत्ते रखनीं आं....गली भुल्ल न जावे चन्न मेरा..’ यह दो गीत ऐसे थे जिसने सोनालिका के प्रोजेक्ट संजीवनी शरणम में बैसाखी की शाम को रंगीन बना दिया। 60 के दशक के इन गानों ने अब बुजुर्ग हो चुकी महिलाओं को पुराने दिन याद करवा कर उनमें उत्साह भर दिया। असल में सोनालिका ने बैसाखी का आयोजन संजीवनी शरणम में रखा था, जिसकी प्रधानगी अमृत सागर मित्तल और उनकी प|ी संगीता मित्तल ने की। प्रोग्राम की शुरुआत बुजुर्गों ने भंगड़े की ड्रेस में झूमर पेश करके की और इसके अलावा कई रंगारंग कार्यक्रम पेश किए गए।

बच्चों की ओर से अकेला छोड़ दिए जाने अथवा रोजगार के सिलसिले में शहर से दूर चले जाने पर अकसर बुजुर्ग मां-बाप को दिन गुजारना मुश्किल हो जाता है। ऐसे बुजुर्गों को समय व्यतीत करने के लिए इंटरनेशनल ट्रैक्टर्स सोनालिका संजीवनी शरणम डे केयर सेंटर के माध्यम से खुशियां दे रहा है। यहां आकर बुजुर्ग अपने खुशनुमा पल बिता रहे हैं। ऐसी ही खुशी उन्हें बैसाखी के पर्व पर मिली जब उन्होंने सांस्कृतिक कार्यक्रम में बढ़चढ़ कर भाग लिया। सोनालिका ग्रुप ने संजीवन शरणम डे केयर सेंटर में बुजुर्गों को समय व्यतीत करने के लिए बड़े हॉल में टीवी लगा कर दिया है। जो बुजुर्ग खेल में रुचि रखते हैं उनके लिए इंडोर गेम्स रूम, टेबल टेनिस रूम, लाइब्रेरी, ध्यान लगाने के लिए केंद्र, फिजियोथेरेपी, बैडमिंटन कोर्ट की सुविधा है। बुजुर्ग सुबह यहां पर आ जाते हैं और अपनी रुचि के मुताबिक खुद को व्यस्त रखते हैं और शाम को घर लौट जाते हैं।

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