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कंंडी में 4 किसानों ने शुरू की थी सेब की बागवानी, अब लगा फल

3 वर्ष पहले
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कंडी क्षेत्र में आम और किन्नू की बागवानी के बाद चार किसानों डॉ. गुरिंदर सिंह बाजवा, हरमनजीत सिंह रंधावा, जतिंदर सिंह लाली बाजवा और मनदीप सिंह गिल ने सेब (ग्रीन एपल) की बागवानी शुरू की है। 2012 में लगाए पौधों को इस बार भरपूर फल लगा है और उनको देखते हुए कंडी के और किसान भी सेब की बागबानी को अपना रहे हैं।

होशियारपुर-ऊना रोड पर गांव चौहाल और बरोटी में बागवानी विभाग के अफसर और किसान डॉ. गुरिंदर सिंह बाजवा ने बताया कि उन्होंने 2012 में 2 एकड़ में 400 पौधे सेब के लगाए थे। उन्होंने नोनी यूनिवर्सिटी सोलन से संपर्क कर पालमपुर की निजी कंपनी से 250 रुपए प्रति पौधा खरीदा था। पिछले साल करीब 50 किलो फसल लगी थी, जिसे 50 रुपए किलो के हिसाब से बेचा। इस साल सभी पौधों को फल लगा है जो कि जून महीने में मार्केट में भेजा जाएगा। इस मौके हरमनजीत सिंह रंधावा ने बताया कि उन्होंने डॉ. गुरिंदर सिंह बाजवा से प्रभावित होकर कंडी के गांव सलेरन में एक एकड़ में 150 पौधे और गांव फुगलाना में 3 कनाल में 100 के करीब पौधे लगाए थे जो तैयार हो चुके हैं। इसी तरह अकाली नेता और जिला के बड़े किसान जतिंदर सिंह लाली बाजवा ने गांव महिलांवाली में 4 कनाल में 40 पौधे और मनदीप सिंह गिल ने गांव कंटियां में एक एकड़ में 100 पौधे लगाए थे।



सेब की बागवानी के लिए कंडी का तापमान सही, मुनाफा देखते हुए बाकी किसान भी जुड़ने लगे : डॉ. बाजवा

डॉ.गुरिंदर सिंह बाजवा और हरमनजीत सिंह रंधावा गांव चौहाल - बरोटी में अपने फार्म पर सेबों के बूटों पर लगे फल दिखलाते हुए। -भास्कर

अन्ना व डोरसेट माइकल हरमन किस्म के हैं पौधे

डॉ. गुरिंदर सिंह बाजवा और हरमनजीत सिंह रंधावा ने बताया कि कंडी इलाका पठानकोट से चंडीगढ़ तक फैला हुआ है। यहां के किसान पहले किन्नू और आम की बागवानी करते थे लेकिन 2012 में उन्होंने सेब की बागवानी अपनाने पर विचार- विमर्श किया तो उन्होंने मिलकर अपने अपने फार्मों में कुछ जमीन के हिस्से पर सेब की बागवानी का काम शुरू किया। इससे उनको बड़ा लाभ होने की उम्मीद है क्योंकि अन्ना और डोरसेट माइकल हरमन किस्म के सेब का स्वाद बाहरले प्रदेशों से आने वाले सेब से बिल्कुल अलग होता है। इसका स्वाद खट्टा-मीठा है और इसके लिए इसे ग्रीन एपल भी कहा जाता है। एक पौधे को साल में एक बार ही फल लगता है। पिछले साल उन्होंने फल पंजाब एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी (पीएयू) लुधियाना को खोज के लिए भेजे थे लेकिन उन्होंने अब तक कुछ नहीं बताया।

कंडी का तापमान सेब की बागवानी के लिए वरदान

बागवानी विभाग के अफसर और किसान डॉ. गुरिंदर सिंह बाजवा ने जानकारी देते हुए बताया कि कंडी में तापमान 5 से 35 डिग्री तक रहता है जो सेब की बागवानी के लिए वरदान है। अगर तापमान बढ़ जाए तो यह फल गल जाता है।

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