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युवती पर लिक्विड फेंकने के आरोपी चाचा ने जेल में लगाया फंदा

3 वर्ष पहले
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भास्कर संवाददाता | कपूरथला/होशियारपुर

8 फरवरी को युवती पर लिक्विड हमला करने वाले आरोपी चाचा ने कपूरथला माडर्न जेल में लोहे के जंगले से परने से फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। घटना सोमवार सुबह 7:45 बजे की है। आरोपी चाचा पिछले 66 दिन से जेल में बंद था। परिवार वालों का आरोप है कि उसे युवती की मां ने पैसे हड़पने के बाद लिक्विड हमले के मामले में झूठा फंसाया था। इस कारण उसने आत्महत्या की है। मृतक हरदीश सिंह के भाई बूटा सिंह की शिकायत पर थाना कोतवाली में महिला मनजीत कौर, उसकी बेटी कोमलप्रीत और एक अन्य व्यक्ति के खिलाफ धारा 306 के तहत केस दर्ज कर लिया है। मामले की जांच जारी है। बता दें कि पीड़ित युवती ढाई महीने से अस्पताल में उपचाराधीन है, इससे पहले पीड़िता के पिता ने उसकी प|ी की ओर से बेटे से न मिलने देने पर सुसाइड की कोशिश की थी। वहीं, पुलिस ने जज पूनम कश्यप की अध्यक्षता में डॉक्टरों के पैनल ने मृतक हरदीश सिंह का पोस्टमार्टम किया। इसके बाद लाश परिजनों को सौंप दी गई है। थाना कोतवाली के एसएचओ हरगुरदेव सिंह ने कहा कि मृतक का पोस्टमार्टम मजिस्ट्रेट जांच में हुआ है। डॉक्टरों का विशेष पैनल शामिल था।

गांव तनोली जिला होशियारपुर निवासी बूटा सिंह ने आरोप लगाया कि उसका भाई हरदीश सिंह पिछले 14 साल से ग्रीस में था। ग्रीस में रहते हुए हरदीश से उनके मामे की बहू मनजीत कौर निवासी औजला फाटक कपूरथला ने अलग-अलग समय साढ़े 7 लाख रुपए मंगवाए थे लेकिन अब उसे देने से इंकार कर रही थी। हरदीश फरवरी महीने में पंजाब आया था। 8 फरवरी को जैसे ही हरदीश अपने पैसे मांगने के लिए मनजीत कौर के घर गया तो उसने अपनी बेटी कोमलदीप पर लिक्विड हमला होने का झूठा केस बना दिया। हकीकत में मनजीत कौर ने खुद ही ड्रामा रचा था। पुलिस ने उसपर जानलेवा हमले का मामला दर्ज कर दिया। 8 फरवरी को पुलिस ने उसे पकड़कर 10 फरवरी को जेल भेज दिया।

हरदीश सिंह

मजिस्ट्रेट जांच के लिए कोर्ट को लिखा : कोहली

जेल के सहायक सुपरिंटेंडेंट ललित कुमार कोहली ने कहा कि हरदीश पर 8 फरवरी को धारा 307 का मामला दर्ज हुआ था। जेल में उसे 10 फरवरी को लाया गया था। तभी से वह परेशान था। सुबह 7:45 बजे आसपास के लोगों ने आवाजें सुनी तो सभी उसकी बैरक की तरफ भागे। हरदीश ने अपनी बैरक में लगे लोहे के जंगले से परना बांधकर कर फंदा लगा लिया। उन्होंने तुरंत मजिस्ट्रेट जांच के लिए स्थानीय अदालत को लिख दिया।

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