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बंजर जमीन पर तालाब बनाकर मछली पालन, लाखों की कमाई

3 वर्ष पहले
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फगवाड़ा के गांव डूमेली में 65 साल के किसान किशोरी लाल 63 एकड़ शामलाट बंजर जमीन पर मछली पालन कर लाखों रुपए कमा रहे हैं। इस जमीन का वह पंचायत को सालाना 18 लाख रुपए किराया दे रहे हैं। किसान फिशरीज पांड से प्रति हेक्टेयर 7000 किलो उत्पाद ले रहा है। पंजाब की मंडी में यह 90 से 110 रुपए प्रति किलो बिक जाती है।

फिशरीज अफसर रोहित बांसल ने बताया विभाग सेम रहित इलाकों के लिए 50 तथा सेम युक्त इलाकों में 90 फीसदी सबसिडी दे रहा है। नमी वाले इलाकों में पांड बनाने पर 60 हजार रुपए प्रति एकड़ तथा खाद के लिए 20 हजार रुपए दिए जा रहे हैं।

इनसे सीखें किसानी

65 साल के किशोरी लाल 63 एकड़ शामलात जमीन पर कर रहे फिश फार्मिंग

पंजाब में फिश की 5 प्रजातियां... पंजाब में फिश की 5 प्रजातियां हैं। इनमें ग्रास कार्प, कामन कार्प (गोल्डन), रोहू, मराख तथा कतला शामिल है। ग्रास कार्प,रोहू तथा कतला की वजन करीब 1 से डेढ़ किलो तक पहुंच जाता है जबकि मराख का वजन 800 ग्राम से 1 किलो तक ही पहुंच पाता है।ग्रास कार्प का मुख्य भोजन घास है तथा ग्रास कार्प की वेस्ट(बीठ) बाकी प्रजातियां भोजन के रूप में ग्रहण कर लेती हैं।

फिश विक्रेता खुद फॅार्म से ले जाते हैं मछली... लुधियाना जालंधर, होशियारपुर, कपूरथला अमृतसर के फिश विक्रेता खुद फॅार्म से फिश उठाकर ले जाते हैं। किसान ने स्पेशल फीड तैयार कर रखी है जिससे पॉड में 800 ग्राम से लेकर तीन से चार किलोग्राम की फिश निकल रही है। फिश फॉर्म के मालिक किशोरी लाल ने बताया 15 साल पहले विभाग से 10 दिन की ट्रेनिंग लेकर काम शुरू किया था। सीड प्लांट 200 रुपए में 2000 हजार जीरा साइज सीड मुहैया करवाता है। 2.5 एकड़ में 25 से 30 हजार सीड डाले जाते हैं। इनमें से 10 हजार सीड लिंग ही जीवत रह पाते हैं। जर्मन क्रो, हंस तथा बगुले से इन्हें बचाने के लिए तालाब पर नाईलोन धागा लगाया जाता है।

आॅक्सीजन पर निर्भर करती है पैदावार...बाक्स फिश की अधिक पैदावार पानी के पीएच मान तथा आक्सीजन पर निर्भर करती है। मुख्य खुराक प्लेंकटोन है। फिश को आर्टीफिशियल खुराक के रूप में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट तथा मिनरल की आवश्यकता पड़ती है। पीएच मान की बराबर जांच होती रहनी चाहिए। मई ,जून में पानी में आक्सीजन कम हो जाती है जो फिश के लिए खतरे की घंटी है। रात को पानी में मौजूद माइक्रो प्लांट आक्सीजन लेते हैं तथा दिन में छोड़ते हैं। पानी की पीएच साढ़े सात से साढ़े अाठ के बीच रखना पड़ता है। कम होने पर एक एकड़ पांड में 20 किलो चूना मिलाया जाता है। पीएच बढ़ने की सूरत में फिटकरी डाली जाती है।

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