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सिविल सर्जन ने जांच के लिए बनाई थी तीन मेंबरी कमेटी, हफ्ते में देनी थी रिपोर्ट, एक महीने बाद तक स्टाफ के बयान भी नहीं हुए
भास्कर संवाददाता | होशियारपुर
सिविल अस्पताल होशियारपुर में 12 मार्च की रात को संगीता नाम की महिला की डिलिवरी के समय बच्चेदानी को उल्टा दोबारा अंदर डाल दिया गया था, जिस वजह से महिला की हालत गंभीर हो गई थी और उसे अमृतसर रेफर करना पड़ा था। इस मामले में एक महीने बाद भी पीड़ित परिवार को इंसाफ नहीं मिला है। शुक्रवार को पीड़ित परिवार के सदस्य सिविल सर्जन रेनू सूद से मिले।
सिविल सर्जन से मिलने के बाद संगीता के पति लवदीप ने बताया कि डॉ. रेनू सूद ने उन्हें कहा है कि उनके पास इस तरह के कई केस हैं। जांच में सारे स्टाफ के बयान होने होते हैं। इस दौरान डॉक्टरों और स्टाफ की ड्यूटी अलग-अलग लग जाती है, जिससे उनके बयान अभी तक नहीं लिए गए हैं। जब पीड़ित परिवार के लोगों ने कहा कि वह इंतजार नहीं कर सकते। जल्दी जांच की जाए नहीं तो वह विभाग के खिलाफ धरना लगाएंगे तो डॉ. रेनू सूद ने एक सप्ताह में जांच पूरी करवाने का आश्वासन दिया।
लवदीप ने बताया कि घटना के बाद सिविल सर्जन ने जांच के लिए तीन मेंबरी कमेटी बनाई थी और उसकी रिपोर्ट एक सप्ताह में आनी थी लेकिन एक महीने बाद भी जांच पूरी नहीं हुई है। उन्होंने पुलिस में भी इसकी शिकायत की थी। शुक्रवार को थाना मॉडल टाउन के थानाध्यक्ष नरिंदर कुमार ने कहा कि जब तक सेहत विभाग की कमेटी की जांच की रिपोर्ट नहीं आ जाती वह किसी के खिलाफ मामला दर्ज नहीं कर सकते।
लवदीप बोला- सिविल अस्पताल पर यकीन नहीं, प|ी का निजी अस्पताल में करवा रहे इलाज
सिविल सर्जन दफ्तर के बाहर जानकारी देते लवदीप, सुषमा, ममता, नरिंदर कौर, बलविंदर कौर, अमरजीत कौर और गुरप्रीत सिंह।
घटना के बाद भी नहीं आई गायनी डॉक्टर
इस घटना के बाद भी होशियारपुर सिविल अस्पताल में कोई गायनी डॉक्टर नहीं आई है, जबकि यहां गायनी की दो पोस्ट खाली हैं। सारा काम जिले से एमबीबीएस डॉक्टरों को बुलाकर और नर्सों के सहारे चलाया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि होशियारपुर सिविल अस्पताल में रोजाना 10 से लेकर 15 तक डिलिवरियां हो रही हैं और महीने की औसतन 200 के करीब डिलिवरियां हो जाती हैं और ज्यादातर इनमें गरीब परिवार ही आते हैं जो कि प्राइवेट अस्पतालों का खर्चा नहीं झेल सकते।
लवदीप ने बताया कि प|ी के इलाज पर अभी तक 50 हजार रुपए उधार लेकर खर्च कर चुके हैं। संगीता की सेहत अभी भी ठीक नहीं है लेकिन वह प्राइवेट डॉक्टर से इलाज करवा रहे हैं क्योंकि उनको सरकारी अस्पताल पर यकीन ही नहीं रहा। उन्होंने कहा कि वह इस मामले को उच्च अधिकारियों के ध्यान में लाकर सेहत विभाग से रिपोर्ट मांगेंगे। इस मौके पर सुषमा, ममता, नरिंदर कौर, बलविंदर कौर, अमरजीत कौर, गुरप्रीत सिंह, विनोद कुमार, कपिल, शैली मल्होत्रा, विकास मल्होत्रा, रिंकू, यतिन, नितिन, मनु, राजकुमार, बाबा मौजूद थे।
पिछले साल सितंबर में हुई थी महिला की मौत
सिविल अस्पताल के गायनी वार्ड में ऐसे मामले पहले भी सामने आ चुके हैं। ऐसा ही एक मामला 25 फरवरी को देर सायं करीब साढ़े 8 बजे सामने आया था जब एक गर्भवती महिला को खून चढ़ाए जाने के बाद उसके शरीर पर लाल धब्बे पड़ने शुरू हो गए। इसे देख गर्भवती महिला के परिजनों को मरीज अमृतसर ले जाने के लिए कह दिया गया था। ऐसा ही एक मामला 16 सितंबर 2017 को पेश आया था जब डिलिवरी के दौरान रजनी नाम की मरीज की डॉक्टर और स्टाफ ब्लीडिंग नहीं रोक पाए तो उसकी अधिक खून बहने से मौत हो गई थी।
कमेटी के पास 20-25 केस होते हैं : डॉ. रेनू सूद
सिविल सर्जन डॉ. रेनू सूद ने कहा कि तीन मेंबरी कमेटी मामले की जांच कर रही है। जब कमेटी द्वारा जांच एक सप्ताह में पूरी कर रिपोर्ट पेश करने की बात कही तो उन्होंने कहा कि कमेटी के पास 20-25 केस और भी हैं। फिर बीच में कुछ छुट्टियां आ जाती है और दो शनिवार और रविवार को तो पक्की छुट्टी होती है जिस वजह से देरी हो रही है। अगले सप्ताह में जांच पूरी कर रिपोर्ट सब्मिट कर दी जाएगी।