पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • National
  • सिटी थाने का हेड मुंशी भगोड़ा घोषित वहीं ड्यूटी कर रहा, समन भी लौटा रहा

सिटी थाने का हेड मुंशी भगोड़ा घोषित वहीं ड्यूटी कर रहा, समन भी लौटा रहा

3 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
भास्कर संवाददाता | होशियारपुर

शहर के सिटी थाने का एक दिलचस्प मामला सामने आया है। कोर्ट ने थाने के जिस हेड मुंशी को भगोड़ा करार दिया था वह वहीं पर ड्यूटी कर रहा है। मुंशी पर 70 हजार रुपए उधार चुकाने के लिए फर्जी चेक देने का आरोप है। कोर्ट में चल रहे केस में पेशी पर न पहुंचने के कारण भगोड़ा करार दिए गए मुंशी के ड्यूटी पर होने की जानकारी एसएचओ को भी है। पीड़ित विवेक शर्मा निवासी गोरां गेट ने 15 जून 2016 को अदालत में केस दायर किया था कि हेड कांस्टेबल जुझार सिंह निवासी शालीमार ने कुछ माह पहले उससे 70 हजार रुपए उधार लिए थे। बाद में पैसे वापस नहीं किए और 70 हजार का चेक दे दिया, जो बाउंस हो गया। कोर्ट में केस जाने के बाद जुझार सिंह पेशी पर आता ही नहीं था। कोर्ट की ओर से कई सम्मन जारी हुए। वारंट भी निकाले गए, लेकिन वह अदालत में पेश ही नहीं हुआ तो आखिरकार मजिस्ट्रेट गुरशेर सिंह ने उसे 16 मार्च 2018 को भगोड़ा करार दे दिया।

कोर्ट की अवमानना
जुझार सिंह पिछले कई सालों से ही सिटी थाने में तैनात है। बहुत कम समय के लिए उसकी तैनाती बाहर के थाने में हुई थी। कुछ समय बाद वह दोबारा थाना सिटी में आ गया। काफी समय से वह थाना सिटी में मुख्य मुंशी के तौर पर कार्यरत है। अदालत के संबंधी कागजात मुंशी के पास ही पहले आते हैं। अदालत को किस तरह से जुझार सिंह के साथ एसएचओ ने भ्रम में रखा यह जीता जागता उदाहरण हैरान करने वाला है। केस दायर होने के बाद अदालत ने जुझार सिंह को उसके पते पर नोटिस भेजा। 6 मार्च 2017 को अदालत ने जमानती वारंट जारी किया और वह वापस आ गया और उस पर यह लिखा हुआ था कि जुझार सिंह नहीं मिले उसके बाद अदालत ने 6 जून 2017, 10 अगस्त 2017, 18 सितम्बर 2017 लगातार चार जमानती वारंट जारी किए। इसके बावजूद सारे वारंट वापस होते रहे कि जुझार सिंह मिल नहीं रहे। 20 अक्टूबर 2017 को अदालत ने पहला गैरजमानती वारंट जारी किया उसके बाद 22 नवम्बर, 17 जनवरी 2018 को जुझार सिंह के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी हुए। सारे गैर जमानती वारंट सिटी थाने में ही आते। जुझार सिंह खुद सारे वारंट लौटाते रहे कि जुझार सिंह मिल नहीं रहे। एसएचओ जगदीश अत्तरी के भी इस बारे में जानकारी थी। अंत में कोर्ट ने 16 फरवरी 2018 को जुझार सिंह को भगोड़ा करार देने की कार्रवाई शुरू करते हुए नोटिस जारी की, लेकिन इसके बावजूद मुंशी फिर पेश नहीं हुए और आखिरकार अदालत ने 16 मार्च 2018 को उसे भगौड़ा करार दे दिया।

आरोपी मुंशी खुद यह कह कर गैर जमानती वारंट लौटाता रहा कि जुझार सिंह मिल ही नहीं रहे
जुझार सिंह पिछले कई सालों से ही सिटी थाने में तैनात है। बहुत कम समय के लिए उसकी तैनाती बाहर के थाने में हुई थी। कुछ समय बाद वह दोबारा थाना सिटी में आ गया। काफी समय से वह थाना सिटी में मुख्य मुंशी के तौर पर कार्यरत है। अदालत के संबंधी कागजात मुंशी के पास ही पहले आते हैं। अदालत को किस तरह से जुझार सिंह के साथ एसएचओ ने भ्रम में रखा यह जीता जागता उदाहरण हैरान करने वाला है। केस दायर होने के बाद अदालत ने जुझार सिंह को उसके पते पर नोटिस भेजा। 6 मार्च 2017 को अदालत ने जमानती वारंट जारी किया और वह वापस आ गया और उस पर यह लिखा हुआ था कि जुझार सिंह नहीं मिले उसके बाद अदालत ने 6 जून 2017, 10 अगस्त 2017, 18 सितम्बर 2017 लगातार चार जमानती वारंट जारी किए। इसके बावजूद सारे वारंट वापस होते रहे कि जुझार सिंह मिल नहीं रहे। 20 अक्टूबर 2017 को अदालत ने पहला गैरजमानती वारंट जारी किया उसके बाद 22 नवम्बर, 17 जनवरी 2018 को जुझार सिंह के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी हुए। सारे गैर जमानती वारंट सिटी थाने में ही आते। जुझार सिंह खुद सारे वारंट लौटाते रहे कि जुझार सिंह मिल नहीं रहे। एसएचओ जगदीश अत्तरी के भी इस बारे में जानकारी थी। अंत में कोर्ट ने 16 फरवरी 2018 को जुझार सिंह को भगोड़ा करार देने की कार्रवाई शुरू करते हुए नोटिस जारी की, लेकिन इसके बावजूद मुंशी फिर पेश नहीं हुए और आखिरकार अदालत ने 16 मार्च 2018 को उसे भगौड़ा करार दे दिया।

जानकारी नहीं, लेकिन मामला गंभीर : एसएसपी
जब इस संबंधी एसएसपी जे. ईलनचेजियन से बात की गई, तो उन्होंने कहा कि यह मामला उनके ध्यान में नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर ऐसा है तो यह गंभीर मामला है और वह इस पर जल्द कार्रवाई की जाएगी।

जुझार सिंह पिछले कई सालों से ही सिटी थाने में तैनात है। बहुत कम समय के लिए उसकी तैनाती बाहर के थाने में हुई थी। कुछ समय बाद वह दोबारा थाना सिटी में आ गया। काफी समय से वह थाना सिटी में मुख्य मुंशी के तौर पर कार्यरत है। अदालत के संबंधी कागजात मुंशी के पास ही पहले आते हैं। अदालत को किस तरह से जुझार सिंह के साथ एसएचओ ने भ्रम में रखा यह जीता जागता उदाहरण हैरान करने वाला है। केस दायर होने के बाद अदालत ने जुझार सिंह को उसके पते पर नोटिस भेजा। 6 मार्च 2017 को अदालत ने जमानती वारंट जारी किया और वह वापस आ गया और उस पर यह लिखा हुआ था कि जुझार सिंह नहीं मिले उसके बाद अदालत ने 6 जून 2017, 10 अगस्त 2017, 18 सितम्बर 2017 लगातार चार जमानती वारंट जारी किए। इसके बावजूद सारे वारंट वापस होते रहे कि जुझार सिंह मिल नहीं रहे। 20 अक्टूबर 2017 को अदालत ने पहला गैरजमानती वारंट जारी किया उसके बाद 22 नवम्बर, 17 जनवरी 2018 को जुझार सिंह के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी हुए। सारे गैर जमानती वारंट सिटी थाने में ही आते। जुझार सिंह खुद सारे वारंट लौटाते रहे कि जुझार सिंह मिल नहीं रहे। एसएचओ जगदीश अत्तरी के भी इस बारे में जानकारी थी। अंत में कोर्ट ने 16 फरवरी 2018 को जुझार सिंह को भगोड़ा करार देने की कार्रवाई शुरू करते हुए नोटिस जारी की, लेकिन इसके बावजूद मुंशी फिर पेश नहीं हुए और आखिरकार अदालत ने 16 मार्च 2018 को उसे भगौड़ा करार दे दिया।

खबरें और भी हैं...