मेहताब सिंह गिल आयोग की रिपोर्ट | राजनीतिक रंजिश के तहत दर्ज हुए केस
शिरोमणि अकाली दल (शिअद)-भाजपा गठबंधन के शासन के दौरान सिमरनजीत सिंह मान और सुखपाल सिंह खैहरा समेत दूसरे लोगों पर दर्ज हुए मामलों की जांच कर रहे जस्टिस (रिटायर्ड) मेहताब सिंह गिल आयोग ने अपनी छठी अंतरिम रिपोर्ट मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को सौंप दी है। इस रिपोर्ट में आयोग ने खुलासा किया है कि राजनीतिक रंजिश के तहत लोगों पर झूठे केस दर्ज किए गए हैं।
आयोग की रिपोर्ट में सबसे चौंकाने वाला मामला जगराओं के गांव कोंके की पंचायत मेंबर सुखविंदर सिंह मिट्ठू का है। आयोग ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि मिट्ठू पर झूठा पर्चा दर्ज करने में एक-दो नहीं बल्कि पुलिस के 182 अफसर दोषी हैं और इन पर कार्रवाई होनी चाहिए। जस्टिस गिल ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि मिट्ठू ने कनाडा निवासी अपनी प|ी के कत्ल के संबंध में प|ी के रिश्तेदारों के खिलाफ शिकायत दी थी लेकिन मिट्ठू पर ही 8 झूठे पर्चे दर्ज कर दिए गए। अदालत ने मिट्ठू की प|ी की मां, मामा और कुछ पुलिस कर्मचारियों को कत्ल के केस में दोषी ठहराया और मिट्ठू पर दर्ज सभी 8 मामलों में अदालत ने उन्हें बरी कर दिया था। आयोग ने माना कि मिट्ठू को झूठे केस में फंसाने और उसकी तरफ से अपनी प|ी के रिश्तेदारों के विरुद्ध की गई शिकायत को वापस करवाने की कोशिश करने के लिए 182 पुलिस अधिकारी दोषी हैं। कमिशन ने इन सभी पुलिस आधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की सिफारिश की है। शुक्रवार को पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को आयोग के चेयरमैन जस्टिस गिल की तरफ से छठी अंतरिम रिपोर्ट सौंपी गई। इसमें 240 मामलों में से 47 मामलों में कार्रवाई करने की सिफारश की गई है जबकि 193 केस विभिन्न कारणों से रद कर दिए गए हैं।
एक आदमी को झूठे केस में फंसाने वाले 182 अफसर दोषी, कार्रवाई हो
मान, खैहरा पर दर्ज मामले भी झूठे
सिमरनजीत सिंह मान के विरुद्ध केस के संबंध में आयोग इस निष्कर्ष पर पहुंचा है कि 10 नवंबर, 2015 को फरीदकोट के गांव बरगाड़ी में श्री गुरु ग्रंथ साहब जी की बेअदबी के विरुद्ध किए गए सरबत खालसा के दौरान न ही उन्होंने कोई भाषण दिया, न ही कोई शब्द बोला। अकालियों और बीबी जागीर कौर की तरफ से उनको देशद्रोह के इस मामले में झूठा फंसाया गया। सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि आयोग ने मान के अलावा खैहरा और उनके समर्थकों के विरुद्ध 17 एफआईआर भी रद करने की सिफारश की है। अकाली सरकार द्वारा 2007-08 के दौरान खैहरा और उनके समर्थकों पर दर्ज किए गए इन मामलों को आयोग ने ट्रायल कोर्ट से रद्द करने की सिफारश की है।
आयोग को अब तक मिली 4349 शिकायतें
आयोग ने अब तक प्राप्त 4349 शिकायतें में से 895 की जांच पूरी कर फैसला लिया है। विभिन्न जिलों के लिए गृह विभाग पंजाब की तरफ से जि़ला मैजिस्ट्रेट और जि़ला अटार्नी नोडल अफ़सर नियुक्त किए गए थे। इन नोडल अफसरों ने अपनी कार्रवाई रिपोर्ट और विभिन्न शिकायतों की स्थिति आयोग को भेजी हैं। जस्टिस गिल के अनुसार, जिन्होंने अपनी कार्रवाई रिपोर्ट आयोग को भेजी है, उनमें डीएम बठिंडा, डीएम फरीदकोट, डीएम होशियारपुर, डीएम जालंधर, डीएम लुधियाना, डीएम मोगा, डीएम पटियाला, डीएम संगरूर, डीएम एसएएस नगर और डीएम तरन तारन शामिल हैं। फिरोजपुर, गुरदासपुर और कपूरथला जिलों के नोडल अफसरों से कोई भी प्रगति रिपोर्ट प्राप्त नहीं हुई है।