हुसैनाबाद | रमजान उल मुबारक की अहमियत और फजीलत बेशुमार है, अल्लाह के नजर में हर दिन हर माह बराबर है। लेकिन वही अल्लाह रमजान को बहुत प्रिय रखता है। इसी माह कुरान के नाजिल होने का जिक्र करते हुए पूरा महीना मोमिन इबादत के नाम कर देता है। ये बातें कायदे मिल्लत के लेखक सह मौलाना सैयद मुसवी रजा ने रविवार को माह-ए-रमजान के अवसर पर जपला स्थित अपने आवास पर बातचीत के दौरान पत्रकारों को बताया। उन्होंने बताया की रोज़ा शब्द का अर्थ किसी भी चीज से अपने आपको रोकते हुए गलत, फिजूल, झूठ, बुराई करने वाली चीजों से दूरी बनाए रखना है। उन्होंने कहा कि उपवास करने का प्रचलन लगभग सभी धर्म व समाज में है, धार्मिक ग्रंथों में भी इसका जिक्र आया है। उन्होंने कहा कि बाइबिल में जिक्र किया गया है कि हज़रत मसीह ने 40 दिन रोज़े रखे थे। क़ुरान साफ साफ बयान करता है कि रोज़ा पिछली पिछली उम्मतों पर भी वाजिब था रोज़ा रखने के कई फायदे हैं। उन्होंने कहा कि क़ुरान में ही अल्लाह फरमाता है कि रोज़ा इंसानी रूह को मजबूत करता है, उसे ताकत देता है। रोज़ा अमीरी और गरीबी के फर्क को मिटाता है। उन्होंने कहा कि रोजा रखने से स्वास्थ्य और चिकित्सा के मामले में भी सुधार लाता है।