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सुबह पांच बजे से ही शुरू हुई वटवृक्ष की परिक्रमा

3 वर्ष पहले
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अनुमंडल क्षेत्र की महिलाएं अखंड सुहाग की कामना के साथ वटवृक्ष की पूजा-अर्चना कर अपने पति की लंबी आयु की कामना की। पूजा-अर्चना करने वालों में मुख्य रूप से सविता देवी, शारदा भारती, रानी मंजु शर्मा, सोनी देवी, सरिता देवी, रिता देवी, इंदु देवी, सोशिनता देवी, उर्मिला देवी, उषा देवी, संध्या कश्यप, सीमा देवी सहित कई अन्य महिलाएं शामिल थीं।

हैदरनगर में भी हुई पूजा

हैदरनगर | शहर सहित ग्रामीण क्षेत्र के कोने कोने में सुहागिन महिलाएं मंगलवार को सुबह से ही सावित्री पूजा को लेकर काफी सक्रिय रहीं। उन्होंने समीपवर्ती वट वृक्ष पर जलाभिषेक सहित पूजा अर्चना के बाद संबंधित पुरोहितों को सामर्थ्य अनुरूप दान व चढ़ावा समर्पित भी किया। मौके पर गायत्री देवी, मीरा देवी, अलका, बेली देवी, पूनम, अनीता देवी सहित अन्य महिलाओं ने कहा कि इस पूजा में सुहागिन महिलाओं द्वारा अपने पति की लंबी आयु की कामना व सपरिवारों के लिए सुख, समृद्धि, शांति की अराधना ही श्रेष्ठ है। हैदरनगर देवी मंदिर परिसर, बड़ा शिवालय परिसर व प्लस टू हाईस्कूल मुख्य गेट के सामने वट वृक्ष स्थल पर महिलाओं की भीड़ दोपहर तक जमी रही।

मोहम्मदगंज में भी हुई पूजा अर्चना

कच्चे सूत से वटवृक्ष के तने को बांध मांगा वर

पांडू | प्रखंड में वट सावित्री की पूजा मंगलवार को धूमधाम से हुई। सुहागिनों ने पति के दीर्घायु होने की कामना से वटवृक्ष की पूजा की। वटवृक्ष की परिक्रमा कर कच्चे सूत के धागे को वटवृक्ष के तने में बांधा गया। पौराणिक कथा के अनुसार वटवृक्ष के नीचे प|ी सावित्री की गोद में सोए सत्यवान के प्राण यमराज ने हर लिए थे। अपने सतित्व के बल पर सावित्री ने यमलोक से अपने पति के प्राण वापस लाए थे। उसी समय से ज्येष्ठ की अमावस्या तिथि को यह व्रत किया जाता है। वटवृक्ष के साथ सत्यवान सावित्री की आटे की मूर्ति बनाकर पूजा की गई। ग्राम ओरडीहा के वटवृक्ष के नीचे सुबह पांच बजे से ही व्रतियों की भीड़ लगनी शुरू हो गयी थी। कूटमूं, सल्हना, सिहलदे, ओरडीहा की महिलाओं ने दोपहर तक यहां पूजा-अर्चना की।

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